भारत की पहली महिला वनस्पति वैज्ञानिक |
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सोमवार, 24 मार्च 2025
❇️ गन्ने की मिठास और भारत की पहली महिला वनस्पति वैज्ञानिक
रविवार, 10 नवंबर 2024
हँसने वाला अनोखा पेड़ (Unique laughing Tree)
हँसने वाला अनोखा पेड़ |
हँसने वाले पेड़ को गुदगुदाते पर्यटक (विडियो) |
प्राकृतिक सुंदरता, जैव विविधता, अनोखी विशेषता, स्पर्श, गुदगुदी, शाखाएँ, विशिष्ट, वानस्पतिक, चर्चा का विषय, संवेदनशील, जीव, स्थानीय, निवासियों, पर्यटकों, प्रतिक्रिया, वैज्ञानिकों, वनस्पति शास्त्रियों, रहस्यमयी, अध्ययन, कोशिकाएँ, ऊतकों, रासायनिक तत्व, मौजूद, मात्रा, तापमान, तनाव, अनोखे गुण, शोध, भविष्य, अचंभा, योगदान, वास्तव, मध्यम, चमकदार, अंडाकार, बीजों, छाल, बीमारियों, बुखार, दस्त, त्वचा रोगों, इलाज, इस्तेमाल, जीवों, पक्षियों, भोजन, स्रोत, पर्यावरण संतुलित, सहयोग, प्रदान, सहायक, आकर्षण, विशेष केंद्र, लोककथाओं, अदृश्य शक्ति, संकेत, चमत्कार, अलौकिक, जिज्ञासा, कौतूहल, पर्यटन, पहलुओं, उजागर.
शनिवार, 2 नवंबर 2024
पाती गंगा माँ की ...!
मेरे प्यारे बच्चों,
मैं गंगा हूँ, जिसे भारतवासी 'माँ' कहकर पुकारते हैं। हिमालय की शांत गोद से निकलकर, मैं इस धरती पर जीवन का संचार करती आई हूँ। सदियों से मैं इस देश की आत्मा और संकृति का आधार रही हूँ। मैं अपने अमृततुल्य जल से देश की धरती को सींचती आई हूँ। यहाँ के खेतों में लहलहाती फसलें और फसलों पर झूमती बालियाँ मेरे जल का गुणगान करती थीं। मेरे आँचल पर बसे गाँव, कस्बों और शहरों की रौनक मुझसे रही है। एक समय था जब लोग मेरे जल को अमृत समझते थे। भारतवासियों का कोई व्रत, त्यौहार, पर्व-संस्कार आदि 'गंगाजल' के बिना अधूरा रहा करता था। पर आजकल स्थिति बदल गए हैं। मेरे जल को गंदा किया जा रहा है। मेरे तटों पर कूड़ा फैलाया जा रहा है। कई उद्योगों का मलीन पानी भी मुझमें बहाया जा रहा है। मेरे जल में रहने वाले जीव-जंतु भी खत्म हो रहे हैं।
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पवित्र गंगा नदी |
मैं देखी हूँ कि लोग कैसे मेरे तटों पर आकर मुझमें स्नान करते हैं और फिर उसी पानी को गंदा करते हैं। मैं देखती हूँ कि कैसे लोग मेरे जल में कपड़े धोते हैं, बर्तन साफ करते हैं और यहां तक कि शौच भी करते हैं। मैं देखती हूँ कि कैसे लोग मेरे जल में मूर्तियाँ विसर्जित करते हैं। मुझे बहुत दुख होता है जब मैं देखती हूँ कि लोग मेरे महत्त्व को भूल रहे हैं। वे मुझे सिर्फ मुझे एक नदी नहीं, बल्कि एक जिवंत देवी मानते थे। लेकिन आजकल वे मुझे सिर्फ एक गंदे नाले के रूप में समझने लगे हैं।
आपको पता है मुझमें बढ़ते हुए इस प्रदूषण के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण है आपका घरेलू कचरा। घरों से निकलने वाला कचरा सीधे गंगा में बहा दिया जाता है। उद्योगों का गंदा पानी भी गंगा को प्रदूषित करता है। कृषि रसायन जैसे कीटनाशक और उर्वरक भी गंगा के पानी को दूषित करते हैं। धार्मिक-अनुष्ठानों के दौरान मूर्तियाँ और अन्य सामग्री गंगा में विसर्जित की जाती है जो भी एक बड़ा कारण है। बढ़ता प्रदूषण यहाँ के पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य के लिए बहुत बड़ा खतरा है। इससे मनुष्यों के अलावा पशु-पक्षियों और जलीय जीवों का जीवन संकट में है, मत्स्य पालन का काम प्रभावित हो रहा है और मेरे पानी पीने से कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। इसके अलावा, जल-प्रदूषण आसपास के लोगों के आजीविका के साधन पर्यटन को भी प्रभावित कर रहा है।
अपनी गंगा को बचाने के लिए कई आवश्यक कदम उठाने होंगे। सबसे पहले आपको लोगों को गंगा प्रदूषण के खतरों के बारे में जागरूक करना होगा। कचरे को अलग-अलग करके उसका निस्तारण करना होगा। उद्योगों को अपने अपशिष्ट का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करना होगा। खेतों में कम से कम रसायनों का इस्तेमाल करना होगा। धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान पर्यावरण के अनुकूल सामग्री का इस्तेमाल करना होगा। सरकार को भी गंगा को बचाने के लिए सख्त कानून बनाना होगा।
मैं आपसे विनती करती हूँ कि आप मुझे बचाने में मेरी मदद करें। आप अपने घर से निकलने वाला कचरा कूड़ेदान में डालें। आप मेरे जल को प्रदूषित करने से बचें। आप मेरे तटों को साफ रखें। आप दूसरों को भी मेरे संरक्षण के लिए जागरूक करें। यदि आपने ऐसा किया तो मैं फिर से उतनी ही स्वच्छ और निर्मल हो जाऊंगी जैसी पहले थी। मैं फिर से लोगों को जीवनदान दूंगी। मैं फिर से धरती की शोभा बढ़ाऊंगी।
आप सभी से मेरी यही विनती है कि आप मुझे बचाएं। मैं आपकी माँ हूँ, आपकी बहन हूँ, आपकी दोस्त हूँ। आप मुझे बचाकर अपना कर्तव्य निभाएं।
आपकी अपनी नदी
- गंगा
बुधवार, 30 अक्टूबर 2024
इलेक्ट्रिक गाड़ियों में है भविष्य के यातायात का सुख...
अमिताभ सरन |
शनिवार, 26 अक्टूबर 2024
जिद पढ़ने और पढ़ाने की..!
साभार - दैनिक भाष्कर |
शुक्रवार, 25 अक्टूबर 2024
बांसवाड़ा - चेरापूंजी है रेगिस्तान में...!
राजस्थान की पहचान अक्सर रेगिस्तान, किलों, महलों और शाही धरोहरों से की जाती है, लेकिन इस विशाल राज्य में प्राकृतिक सौंदर्य और भौगोलिक विविधता का अनूठा संगम देखने को मिलता है। राजस्थान में कई ऐसे क्षेत्र हैं जो हरियाली, जल स्रोतों और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध हैं। बांसवाड़ा जिला, जिसे "सौ द्वीपों का शहर" भी कहा जाता है, इसी विविधता का प्रतीक है। यह जिला अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, सांस्कृतिक धरोहर और शांतिपूर्ण वातावरण के कारण प्रसिद्ध है।
बांसवाड़ा का नाम इसके आसपास बांस के वृक्षों की अधिकता के कारण पड़ा है। यह क्षेत्र अपने आप में एक अद्भुत स्थल है, जहां न केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्त्व है, बल्कि यहां की प्राकृतिक छटा भी पर्यटकों को आकर्षित करती है। बांसवाड़ा को "सौ द्वीपों का शहर" कहा जाता है क्योंकि यह क्षेत्र माही नदी से घिरा हुआ है और नदी में कई छोटे-छोटे द्वीप हैं। माही बांध के निर्माण के बाद यहां की भौगोलिक संरचना में और भी निखार आया है, जिससे यह क्षेत्र एक अनोखे पर्यटन स्थल के रूप में उभर कर सामने आया है।
बांसवाड़ा की प्रमुख विशेषता यहां का हरित परिदृश्य है। जबकि राजस्थान का अधिकांश हिस्सा शुष्क और रेगिस्तानी है, बांसवाड़ा का इलाका हरियाली से भरपूर है। यहां माही नदी के साथ-साथ अन्य छोटी नदियां और झीलें भी हैं, जो इस क्षेत्र को "राजस्थान का चेरापूंजी" के रूप में पहचान दिलाती हैं। माही नदी पर बने कई बांधों के कारण यहां जल के स्रोत पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं, जिससे कृषि भी यहां की प्रमुख गतिविधियों में से एक है। धान की खेती यहां सबसे अधिक की जाती है, और इसलिए इसे "धान का कटोरा" भी कहा जाता है।
बांसवाड़ा की सांस्कृतिक धरोहर भी बहुत समृद्ध है। यहां की आदिवासी जनसंख्या राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को और भी निखारती है। गामट, वालर, और भगोरिया जैसे आदिवासी लोकनृत्य इस क्षेत्र की संस्कृति का हिस्सा हैं। इसके अलावा, बांसवाड़ा के आस-पास कई प्राचीन मंदिर और धार्मिक स्थल भी हैं, जो यहां की धार्मिक आस्था का प्रतीक हैं। आनंद सागर झील, त्रिपुरा सुंदरी मंदिर, और कालिका माता मंदिर यहां के प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं। हर साल यहां कई धार्मिक और सांस्कृतिक मेले भी आयोजित होते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक हिस्सा लेते हैं।
पर्यटन की दृष्टि से बांसवाड़ा में अपार संभावनाएं हैं। यहां के जलाशय, द्वीप, हरे-भरे जंगल और शांत वातावरण इसे एक उत्कृष्ट पर्यटन स्थल बनाते हैं। जो पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य और शांति की खोज में होते हैं, उनके लिए बांसवाड़ा एक आदर्श स्थान है। इसके अलावा, साहसिक खेलों और जलक्रीड़ाओं के लिए भी यह क्षेत्र उपयुक्त है। माही नदी के आसपास बोटिंग, कयाकिंग और अन्य गतिविधियों का आयोजन पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करता है।
बांसवाड़ा के सौंदर्य, सांस्कृतिक विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के बावजूद, यह क्षेत्र अपेक्षाकृत कम प्रसिद्ध है। राजस्थान के अन्य प्रसिद्ध शहरों की तरह यह भी पर्यटन के नक्शे पर प्रमुखता से उभर सकता है, यदि इसके पर्यटन को और अधिक प्रोत्साहन दिया जाए।
इस प्रकार, बांसवाड़ा केवल राजस्थान के रेगिस्तानी परिदृश्य से अलग एक हरित और जलमय स्थल है, जो अपनी अनूठी पहचान और अद्भुत सौंदर्य से लोगों का ध्यान खींचता है।
मंगलवार, 28 नवंबर 2023
अपशिष्ट प्रबंधन: एक चुनौती या अवसर?
अपशिष्ट की समस्या आधुनिक जीवन शैली, बढ़ते शहरी करण एवं औद्योगीकरण से जनित समस्या हैं। ऐसा नहीं है कि प्राचीन काल के हमारे समाज में अपशिष्ट नहीं होता था। किन्तु होने वाला कचरा पुनर्चक्रण के अनुकूल होता था। लोग प्रकृति कि गोद में रहते, प्राकृतिक वस्तुओं का उपयोग करते और होने वाला कचरा पुनः प्रकृति में अपघटित हो जाता था। अतः उस समय लोग सुखी थे। आज की स्थिति इसके विपरीत है, कहने के लिए हम विकास कर रहे हैं। लेकिन देखा जाय तो अपशिष्ट प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष दोनों रूपों से हमारे स्वास्थ्य एवं कल्याण को कई तरह से प्रभावित कर रहा है। चाहे वो आम जीवन में प्लास्टिक का उपयोग हो या कृषि में रासायनिक खाद व कीटनाशकों के इस्तेमाल से होने वाली समस्या। आज हम अपनी प्रगति अपने स्वयं के स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ की कीमत पर कर रहे हैं।
'अपशिष्ट प्रबंधन' आज के समय में बहुत ही महत्वपूर्ण हो गया है। हम सभी मिलकर अपशिष्ट प्रबंधन की चुनौतियों को दूर कर सकते हैं और अपशिष्ट प्रबंधन के अवसरों का लाभ उठा सकते हैं। अपशिष्ट के कई स्रोत हैं, जिसमें घरेलू, वाणिज्यिक, औद्योगिक और कृषि शामिल है। अपशिष्ट का उचित प्रबंधन न होने से न केवल हमारी धरती बल्कि आकाश में वायु प्रदूषण और समुद्र की गहराइयों तक जल प्रदूषण की समस्या सिर उठा रही है। अपशिष्ट हमारे पारस्थितिक तंत्र को ही नहीं खराब करता है बल्कि यह समाज पर आर्थिक बोझ भी डालता है। अतः समय रहते यदि इसका उचित प्रबंधन न किया गया तो निकट भविष्य में इसके और भी गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
प्लास्टिक अलग करती सफाईकर्मी |
आज के आधुनिक जीवन शैली में जहाँ हम दिन प्रतिदिन प्रगति की ओर अग्रसर हैं। वहीं अपने पीछे रोजाना ढ़ेर सारे प्लास्टिक और इलेक्ट्रोनिक कचरे को फैला रहे हैं। जिसके प्रबंधन में चुनौती के साथ साथ नए अवसर भी तलासे जा रहे हैं। जहाँ प्लास्टिक कचरे का पुरर्चकरण कर नए प्लास्टिक उत्पाद, पर्यायी ईंधन और सड़क निर्माण के क्षेत्र में काम हो रहा है। वहीं जनता में साफ-सफाई व कचरा प्रबंधन के प्रति जागरूकता अभियान कार्यक्रम अपनाए जा रहे हैं। इसी राह पर चलकर भारत का प्राचीन शहर इंदौर अपने आप में अपनी साफ-सफाई और चमचमाती सड़कों के लिए दुनिया भर में नाम कर रहा है। हमें भी बस एक पहल करने की आवश्यकता है। जल्द ही हम इस क्षेत्र में भी अवश्य जीत हासिल करेंगे।
- विकिपीडिया
- अपशिष्ट प्रबंधन-दृष्टि आईएएस
- शून्य अपशिष्ट - यूएनओ
मंगलवार, 26 सितंबर 2023
पवित्र तुलसी: जीवन अमृत स्वरूपा, वनौषधियों की रानी
मंगलवार, 18 अप्रैल 2023
पर्यावरण और पर्यावरणीय समस्याएँ
पर्यावरण किसे कहते हैं?
पर्यावरण एक व्यापक शब्द है जो हमारे आस-पास के सभी जीवनदायी पदार्थों और प्रकृति के साथ हमारे संबंधों को संबोधित करता है। यह हमारे चारों ओर की स्थायित्व और संतुलन को बनाए रखने के लिए आवश्यक है जो हमारे जीवन के लिए आवश्यक है। पर्यावरण समस्याएं उन सभी समस्याओं का समूह है जो पर्यावरण को क्षति पहुंचाती हैं और इसके असामान्य परिणामों से मानव समुदाय को प्रभावित करती हैं।उदाहरण -
वायु, जल, और मृदा के दुष्परिणामों जैसे प्रदूषण, जल विकार, मृदा अपशिष्ट, जंगलों का नष्ट होना, प्राकृतिक संसाधनों की अधिकता का अनुहव होना, इस्तेमाल में अधिक आवश्यकता होना और जीव-जंतु विविधता में कमी शामिल होती है। ये सभी समस्याएं आमतौर पर मानव गतिविधियों और उनके द्वारा उत्पन्न असुरक्षित और असंतुलित प्रभावों से उत्पन्न होती हैं।
पर्यावरणीय मुद्दे (Environmental issues) -
पर्यावरणीय मुद्दे उन समस्याओं या चुनौतियों को संदर्भित करते हैं जो प्राकृतिक दुनिया और उसके पारिस्थितिक तंत्र, साथ ही मानव समाज और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती हैं। ये मुद्दे विभिन्न स्रोतों से उत्पन्न हो सकते हैं, जिनमें औद्योगीकरण, शहरीकरण, वनों की कटाई, कृषि और परिवहन जैसी मानवीय गतिविधियाँ शामिल हैं।
पर्यावरणीय समस्याओं के कुछ उदाहरण -
- जलवायु परिवर्तन (Climate change)
- पर्यावरणीय प्रदूषण (Environmental pollutions)
- वनों की अंधाधुंध कटाई (Deforestation)
- जैव-विविधता की हानि (Loss of biodiversity)
- मिट्टी की गुणवत्ता की गिरावट (Degradation of soil quality)
- अपशिष्ट प्रबंधन (Waste Management)
- संसाधनों की कमी (Scarcity of resources)
- वायु प्रदूषण: वायु प्रदूषण वातावरण में हानिकारक रसायनों और सूक्ष्म कणों की रिहाई के कारण होता है, जिसके परिणामस्वरूप श्वसन संबंधी समस्याएं, हृदय रोग और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होती हैं।
- जल प्रदूषण: जल प्रदूषण जल निकायों में प्रदूषकों की रिहाई के कारण होता है, जो जलीय जीवन को नुकसान पहुंचा सकता है, पीने के पानी को दूषित कर सकता है और स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है।
- मृदा प्रदूषण: मृदा प्रदूषण तब होता है जब जहरीले रसायन और खतरनाक अपशिष्ट मिट्टी में छोड़े जाते हैं, जिससे यह कृषि के लिए अनुपयुक्त हो जाता है और दीर्घकालिक पर्यावरणीय क्षति होती है।
- ध्वनि प्रदूषण: ध्वनि प्रदूषण अत्यधिक शोर है जो मानव स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है, जिसमें सुनवाई हानि, उच्च रक्तचाप और नींद की गड़बड़ी शामिल है।
- प्लास्टिक प्रदूषण: प्लास्टिक प्रदूषण समुद्र सहित पर्यावरण में प्लास्टिक कचरे का संचय है, जिससे समुद्री जीवन और पर्यावरण को नुकसान होता है।
- जलवायु परिवर्तन: जलवायु परिवर्तन वातावरण में ग्रीन हाउस गैसों की रिहाई के कारण होता है, जिससे बढ़ते तापमान, समुद्र के स्तर में वृद्धि और चरम मौसम की घटनाएं होती हैं।
ये सभी मुद्दे आपस में जुड़े हुए हैं और इनके समाधान के लिए व्यापक समाधान की आवश्यकता है।
पर्यावरण समस्याएं वास्तव में बहुत व्यापक हैं और इन्हें हल करने के लिए हमें सभी लोगों के साथ सहयोग करना होगा। इन समस्याओं का सामना करने के लिए, हमें संज्ञान में लाने की आवश्यकता है और अपनी जिम्मेदारियों को समझना होगा। इसके अलावा, हमें सभी तरीकों से प्रदूषण को कम करना, प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कम करना, जल संयंत्रों का इस्तेमाल कम करना, प्लास्टिक के अनुपयुक्त उपयोग को रोकना और पर्यावरण की संरक्षण एवं प्रबंधन में सक्षम होना चाहिए।
आज के समय में, हमें जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक विविधता की हानि जैसी बहुत सी बड़ी पर्यावरण समस्याओं से निपटने की आवश्यकता है। इन समस्याओं का सामना करने के लिए, हमें सही तरीके से उपयोग करने वाले उत्पादों का उपयोग करना चाहिए, जल संयंत्रों और विद्युत उत्पादन में अनुकूलता बनाए रखनी चाहिए, अनुपयुक्त उपयोग को रोकना चाहिए और पर्यावरणीय संबंधों को समझना चाहिए।
पर्यावरणीय समस्याओं से उबरने के उपाय कौन कौन से हैं?
पर्यावरणीय समस्याओं पर काबू पाने के कई तरीके हैं, और इसके लिए व्यक्तियों, समुदायों और सरकारों के सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है। पर्यावरणीय मुद्दों को हल करने के कुछ तरीके यहां दिए गए हैं:
- पर्यावरण जागरूकता बढ़ाएँ: पर्यावरण के मुद्दों के बारे में लोगों को शिक्षित करने से जागरूकता बढ़ाने और अधिक टिकाऊ प्रथाओं को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। यह सार्वजनिक अभियानों, शिक्षा कार्यक्रमों और मीडिया के माध्यम से किया जा सकता है।
- प्रदूषण कम करें: पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों का उपयोग करके, ऊर्जा की खपत को कम करके और बाइकिंग और सार्वजनिक परिवहन जैसे स्वच्छ परिवहन विकल्पों को बढ़ावा देकर प्रदूषण को कम किया जा सकता है।
- प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करें: जल, भूमि और खनिजों जैसे प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग को कम करके आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण को संरक्षित करने में मदद मिल सकती है। यह टिकाऊ कृषि का अभ्यास करके, भोजन की बर्बादी को कम करके, और पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) और खाद बनाने की प्रक्रिया (कंपोस्टिंग) को बढ़ावा देकर किया जा सकता है।
- सतत विकास को बढ़ावा देना: सतत विकास प्रथाओं को प्रोत्साहित करने से आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने में मदद मिल सकती है। यह हरित व्यवसायों का समर्थन करके, अक्षय ऊर्जा में निवेश करके और स्थायी शहरी नियोजन को बढ़ावा देकर किया जा सकता है।
- प्राकृतिक आवास और जैव विविधता की रक्षा करें: एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने के लिए प्राकृतिक आवास और जैव विविधता की रक्षा करना आवश्यक है। यह संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा देकर, वन्यजीव संरक्षण कानूनों को लागू करके और स्थायी वानिकी प्रथाओं का समर्थन करके किया जा सकता है।
- जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन प्रथाओं को अपनाएं: उचित अपशिष्ट प्रबंधन उत्पन्न कचरे की मात्रा को कम करने और अपशिष्ट निपटान के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में मदद कर सकता है। यह पुनर्चक्रण और कंपोस्टिंग को बढ़ावा देकर, एकल-उपयोग वाले उत्पादों को कम करके और अपशिष्ट न्यूनीकरण रणनीतियों को लागू करके किया जा सकता है।
कुल मिलाकर, पर्यावरणीय समस्याओं को दूर करने के लिए सभी हितधारकों के ठोस प्रयास की आवश्यकता है, और भविष्य की पीढ़ियों के लिए पर्यावरण की रक्षा के लिए अभी कार्रवाई करना महत्वपूर्ण है।
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