भारतीय विरासत में खादी एक महत्वपूर्ण वस्तु है जो हम सभी के लिए गौरव का विषय है। खादी भारतीय संस्कृति और सभ्यता के विकास का प्रतीक रहा है। सिंधु घाटी सभ्यता के अवशेषों में खादी के कपड़े के प्रमाण मिले हैं। यह माना जाता है कि खादी का उत्पादन और उपयोग भारत में हजारों सालों से होता आ रहा है। यह कहना अतिशयोक्ति न होगा कि 'जब दुनिया वनवासी जीवन जी रही थी हमने सभ्यता के विकास के साथ ही वस्त्र और आभूषण पहनना सीख लिया था।'
खादी का आधुनिक इतिहास महात्मा गांधी के साथ जुड़ा हुआ है। गांधीजी ने खादी को आत्मनिर्भरता और स्वदेशी का प्रतीक माना। तब से खादी और गांधी एक दूसरे की पूरक से हो गए हैं। उन्होंने लोगों से खादी पहनने और उसका समर्थन करने का आह्वान किया। गांधीजी के प्रयासों से खादी भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया। भारत में खादी का उत्पादन और विपणन 'खादी और ग्रामोद्योग आयोग' (KVIC) द्वारा किया जाता है। KVIC एक सांविधिक निकाय है जो खादी और ग्रामोद्योग के विकास और प्रचार के लिए जिम्मेदार है। खादी भारत की संस्कृति और परंपरा का पहचान बन चुका है। खादी आज देश की पहचान ही नहीं अपितु खादी के उत्पादों की उपयोगिता, उनका देश की अर्थव्यवस्था में योगदान आदि देश के गौरव की बात करता है।
राष्ट्रपिता गांधी और खादी -
गांधी जी और चरखा |
खादी के उत्पाद -
खादी देश की पहचान -
खादी भारत की पहचान है। यह भारत की संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है। खादी का उपयोग भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक प्रतीक भी था। गांधीजी ने खादी को एक राष्ट्रीय आन्दोलन के रूप में विकसित किया था। गांधीजी का मानना था कि खादी का उपयोग करके हम भारत की आर्थिक और राजनीतिक स्वतंत्रता को प्राप्त कर सकते हैं। गांधीजी भारत के राष्ट्रपिता हैं। उन्होंने भारत को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त कराया। गांधीजी ने खादी को एक राष्ट्रीय आन्दोलन के रूप में विकसित किया। उन्होंने खादी को भारत की आर्थिक और राजनीतिक स्वतंत्रता का आधार माना। इस प्रकार गांधीजी के प्रयासों से ही खादी भारत की पहचान बन गई।
खादी के संरक्षण और विकास के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए जा सकते हैं:-
- खादी के उत्पादों के गुणवत्ता में सुधार किया जाना चाहिए।
- खादी के उत्पादों के विपणन के लिए नए तरीकों को विकसित किया जाना चाहिए।
- खादी के उत्पादों को अधिक किफायती बनाया जाना चाहिए।
- खादी के उद्योग को सरकार द्वारा प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।
इन सुझावों के कार्यान्वयन से खादी के उत्पादों की मांग बढ़ेगी और खादी का उद्योग और अधिक विकसित होगा। इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।