पीपल बाबा: जिन्होंने पेड़ों में देखा जीवन
एक प्रेरक पठन और लेखन-अनुभव—जिसमें हम पर्यावरण, जिम्मेदारी और छोटे प्रयासों से बड़े परिवर्तन की संभावना को समझते हैं।
मूल पठन-आलेख
पहले आलेख को ध्यान से पढ़िए। फिर प्रश्नों के उत्तर अपनी समझ के आधार पर दीजिए।
आज़ाद जैन का जन्म 1966 में चंडीगढ़ में हुआ था। उनके पिता सेना में डॉक्टर थे, इसलिए परिवार का जीवन अनुशासन और सेवा-भाव से जुड़ा था। बचपन से ही प्रकृति के प्रति उनकी रुचि विकसित होने लगी। उनकी दादी और चौथी कक्षा के शिक्षक ने पेड़-पौधों के प्रति उनके लगाव को प्रोत्साहित किया। धीरे-धीरे यह रुचि उनके जीवन का उद्देश्य बन गई।
26 जनवरी 1977 को, जब वे पुणे के खड़की सैन्य स्टेशन में थे, उन्होंने अपना पहला पेड़ लगाया। यह छोटा-सा प्रयास उनके लिए एक यादगार शुरुआत साबित हुआ। उस समय शायद उन्हें यह अंदाज़ा नहीं था कि आगे चलकर पेड़ लगाना और उनकी देखभाल करना उनके जीवन का प्रमुख कार्य बन जाएगा।
पेड़ों के प्रति इसी लगाव से ‘Give Me Trees’ नाम का एक हॉबी क्लब शुरू हुआ। समय के साथ यह पहल बढ़ी और ‘Give Me Trees Trust’ के रूप में विकसित हुई। इस संस्था का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखना और बड़ा होने तक उनकी देखभाल करना भी है। इस काम के कारण आज़ाद जैन स्वामी प्रेम परिवर्तन के नाम से प्रसिद्ध हुए और लोग उन्हें स्नेह से ‘पीपल बाबा’ कहने लगे।
पीपल बाबा का मानना है कि वृक्षारोपण की सफलता केवल इस बात से नहीं मापी जा सकती कि कितने पौधे लगाए गए। असली सफलता तब है, जब पौधे जीवित रहें, बढ़ें और अपने आसपास के पर्यावरण को लाभ पहुँचाएँ। पौधों को पानी देना, उनकी रक्षा करना और उनकी नियमित देखभाल करना उतना ही आवश्यक है जितना उन्हें लगाना।
शहरों में पेड़ों की भूमिका विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है। उनकी छाया लोगों को गर्मी से राहत देती है और आसपास के तापमान को कम करने में मदद करती है। पेड़ों की जड़ें वर्षा के पानी को मिट्टी तक पहुँचने में सहायक होती हैं। इससे पानी जमीन में समाने की संभावना बढ़ती है। पेड़ हवा, मिट्टी और स्थानीय पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखने में भी योगदान देते हैं।
पेड़ केवल मनुष्यों के लिए ही उपयोगी नहीं हैं। मधुमक्खियों और तितलियों को फूलों से भोजन मिलता है, जबकि अनेक पक्षी पेड़ों पर घोंसले बनाते हैं और उन्हें आश्रय मिलता है। इस तरह पेड़ अनेक जीवों के जीवन को सहारा देते हैं। जब किसी स्थान पर पेड़ कम हो जाते हैं, तो इन जीवों के लिए भोजन और सुरक्षित ठिकाने भी कम होने लगते हैं।
विद्यार्थी भी पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकते हैं। वे स्कूल या घर के आसपास लगे पौधों की देखभाल कर सकते हैं, पेड़ों की स्थिति पर ध्यान दे सकते हैं और अपने साथियों को पौधों की रक्षा के लिए प्रेरित कर सकते हैं। पीपल बाबा की यात्रा हमें यह समझाती है कि बड़े परिवर्तन की शुरुआत किसी छोटे, निरंतर और जिम्मेदार प्रयास से हो सकती है।
अभ्यास 1 · पठन-बोध
आलेख के आधार पर सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए। प्रश्नों के अंक साथ दिए गए हैं।
शिक्षक / स्व-अध्ययन के लिए उत्तर-संकेत देखें
- स्वामी प्रेम परिवर्तन।
- 1977।
- Give Me Trees Trust।
- उदाहरण: पौधों की देखभाल करना, पेड़ों की स्थिति पर ध्यान देना या साथियों को उनकी रक्षा के लिए प्रेरित करना।
- क्योंकि लगाए गए पौधों का जीवित रहना, बढ़ना और उनकी नियमित देखभाल होना भी आवश्यक है।
- कोई तीन: छाया मिलना; आसपास का तापमान कम करने में सहायता; वर्षा के पानी का मिट्टी में समाने की संभावना बढ़ना।
- कोई दो अलग लाभ: मधुमक्खियों को भोजन; तितलियों को भोजन; पक्षियों को घोंसले बनाने या आश्रय का स्थान। मधुमक्खियों और तितलियों के भोजन को संयुक्त रूप से एक बिंदु माना जा सकता है।
यह अभ्यास IndiCoach का अभ्यास-रूपांतरण है। स्वचालित उत्तर-जाँच केवल प्रारंभिक संकेत देती है; शिक्षक का मूल्यांकन अधिक विश्वसनीय है।
अभ्यास 6 · लेखन अभ्यास
नीचे दिए गए विकल्पों में से एक चुनिए। प्रश्न के सभी निर्देशों को ध्यान में रखते हुए अपना उत्तर लिखिए।
विकल्प 1 · अनौपचारिक ईमेल
आपने पीपल बाबा के कार्यों के बारे में पढ़ा है। अपने मित्र को ईमेल लिखकर बताइए कि आपको उनके काम की कौन-सी बात सबसे अधिक प्रेरक लगी, विद्यार्थी पर्यावरण संरक्षण के लिए क्या कर सकते हैं और आप अपने विद्यालय में कौन-सी पहल शुरू करना चाहेंगे।
विकल्प 2 · डायरी लेखन
आज आपने अपने विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण से संबंधित गतिविधि में भाग लिया। अपनी डायरी में उस अनुभव का वर्णन कीजिए, बताइए कि आपने क्या सीखा और भविष्य में आप क्या करना चाहेंगे।
विकल्प 3 · रिपोर्ट लेखन
आपके विद्यालय में वृक्षारोपण और पौधों की देखभाल पर एक अभियान आयोजित किया गया। विद्यालय की पत्रिका के लिए रिपोर्ट लिखिए। उसमें अभियान का उद्देश्य, विद्यार्थियों की भागीदारी, की गई गतिविधियाँ और आगे की योजना शामिल कीजिए।
नमूना उत्तर: अनौपचारिक ईमेल
विषय: पर्यावरण संरक्षण से मिली प्रेरणा
प्रिय मित्र,
सप्रेम नमस्कार!
हाल ही में मैंने पीपल बाबा के कार्यों के बारे में पढ़ा। मुझे सबसे अच्छी बात यह लगी कि वे केवल पौधे लगाने पर ही ध्यान नहीं देते, बल्कि उनकी देखभाल और सुरक्षा को भी उतना ही महत्त्व देते हैं। इससे मुझे समझ आया कि पर्यावरण की रक्षा के लिए निरंतर प्रयास करना आवश्यक है।
हम विद्यार्थी भी अपने विद्यालय और घर के आसपास पौधों की देखभाल कर सकते हैं। मैं चाहता हूँ कि हमारे विद्यालय में प्रत्येक कक्षा एक पौधे की जिम्मेदारी ले और नियमित रूप से उसकी स्थिति पर ध्यान दे। इससे विद्यार्थियों में जिम्मेदारी की भावना भी विकसित होगी।
तुम्हारे विचार जानने की प्रतीक्षा रहेगी।
तुम्हारा मित