शुक्रवार, 17 अक्टूबर 2025

अभ्यास 1 : अंतरिक्ष में बढ़ता मानवीय हस्तक्षेप

अंतरिक्ष में बढ़ता मानव हस्तक्षेप | IGCSE हिंदी अभ्यास एक (8 अंक) - IndiCoach

📖 आलेख

पृथ्वी के बाहर क्या जीवन है — यह प्रश्न मानवता को सदियों से आकर्षित करता आया है। विज्ञान की प्रगति ने हमें उस दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया है, जहाँ कल्पना और वास्तविकता के बीच की दूरी धीरे-धीरे मिट रही है। आज मनुष्य अंतरिक्ष में केवल देखने नहीं, बल्कि खोज करने निकला है — और उसका सबसे बड़ा साथी बना है रोबोट

सबसे पहले स्पुतनिक-1 पहला कृत्रिम उपग्रह था जिसने 1957 में अंतरिक्ष यात्रा शुरू की

सबसे पहले कृत्रिम उपग्रह 'स्पुतनिक-1' ने जब 1957 में अंतरिक्ष की यात्रा की, तब से लेकर अब तक हजारों यान अंतरिक्ष में भेजे जा चुके हैं। चंद्रमा पर मानव की पहली यात्रा 1969 में 'अपोलो-11' अभियान के माध्यम से हुई थी। तब से लेकर अब तक मनुष्य का ध्यान धीरे-धीरे मंगल, बृहस्पति और शनि जैसे ग्रहों की ओर गया है। लेकिन इन दूरस्थ ग्रहों तक पहुँचना न केवल कठिन है बल्कि मानव जीवन के लिए जोखिम भरा भी है। इसलिए वैज्ञानिकों ने रोबोटिक मिशन की सहायता ली

मंगल ग्रह की सतह पर क्यूरियोसिटी और पर्सिवरेंस जैसे रोबोटिक यान वर्षों से काम कर रहे हैं। ये न केवल मिट्टी और चट्टानों के नमूने एकत्र करते हैं, बल्कि वहाँ के मौसम, तापमान और वातावरण की रासायनिक संरचना का भी अध्ययन करते हैं। इन रोबोटों की खास बात यह है कि इन्हें सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठा वैज्ञानिक दल नियंत्रित करता है। वे सौर ऊर्जा से चलते हैं और स्वचालित रूप से कठिन भूभागों पर संतुलन बनाए रखते हैं।

अब विज्ञान की दिशा और भी साहसिक हो गई है। निजी कंपनियाँ जैसे स्पेसएक्स और ब्लू ओरिजिन जैसी कंपनियाँ भविष्य में मनुष्यों को दूसरी ग्रहों पर भेजने में सक्रिय हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगले सौ वर्षों में मनुष्य अन्य ग्रहों पर बसावट शुरू कर सकता है।

फिर भी, इस उत्साह के साथ अनेक प्रश्न भी उठते हैं — क्या हमें दूसरे ग्रहों के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करने का अधिकार है? क्या अंतरिक्ष को भी हम पृथ्वी की तरह प्रदूषित नहीं कर देंगे? वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि यदि अंतरिक्ष में उपग्रहों और मलबे की मात्रा ऐसे ही बढ़ती रही तो भविष्य के अभियानों को गंभीर खतरा हो सकता है। रोबोट मानव के लिए सबसे बड़ा साथी हैं क्योंकि वे जोखिम भरे स्थानों पर कार्य करते हैं

इसलिए आवश्यक है कि मानव अपनी तकनीकी प्रगति के साथ-साथ नैतिक ज़िम्मेदारी भी निभाए। अंतरिक्ष की खोज हमें यह सिखाती है कि ब्रह्मांड कितना विशाल है, और हमारी पृथ्वी कितनी कीमती। ब्रह्मांड की विशालता हमें विनम्र बनाती है और नैतिक जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा देती है

❓ अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1: 'स्पुतनिक-1' का क्या महत्व था? [1]
  • यह पहला कृत्रिम उपग्रह था। अथवा
  • इसीने मानव की अंतरिक्ष वैज्ञानिक पहल की नींव रखी।
प्रश्न 2: 'क्यूरियोसिटी' और 'पर्सिवरेंस' किस ग्रह पर कार्यरत हैं? [1]
  • मंगल ग्रह पर।
प्रश्न 3: वैज्ञानिक इन रोबोटों को किस प्रकार नियंत्रित करते हैं? [2]
  • इन रोबोटों को पृथ्वी पर बैठे वैज्ञानिक दूरस्थ नियंत्रण द्वारा नियंत्रित करते हैं।
  • ये सौर ऊर्जा से चलते हैं और स्वचालित संतुलन बनाए रखते हैं।
प्रश्न 4: कौन-सी निजी कंपनियाँ मनुष्यों को अन्य ग्रहों पर भेजने की दिशा में कार्य कर रही हैं? [1]
  • स्पेसएक्स और ब्लू ओरिजिन जैसी निजी कंपनियाँ।
प्रश्न 5: लेखक ने रोबोट को 'मनुष्य का सबसे बड़ा साथी' क्यों कहा है? [2]
  • क्योंकि वे जोखिम भरे स्थानों पर भी सुरक्षित रूप से कार्य कर सकते हैं।
  • मानव के लिए आवश्यक जानकारी इकट्ठा करके खोज कार्य को आगे बढ़ाते हैं।
प्रश्न 6: 'ब्रह्मांड की विशालता' लेखक को कौन-सा संदेश देती है? [1]
  • यह हमें विनम्र बनाती है और पृथ्वी के प्रति नैतिक ज़िम्मेदारी निभाने की प्रेरणा देती है।

📝 शिक्षक हेतु सुझाव

विद्यार्थी संक्षिप्त, स्पष्ट और बिंदुवार उत्तर दें। आंशिक सही उत्तरों हेतु आंशिक अंक नहीं दिए जाएँ। शिक्षक अपने विवेक से पूर्णांक अथवा शून्य अंक ही दें।

⚠️ छात्र के लिए सावधानियाँ

  • पहले आलेख को पूरी तरह पढ़ें, फिर प्रश्न हल करें।
  • प्रश्न पढ़कर, उसके प्रश्न-सूचक शव्द (क्या, कब, क्यों, कैसे, कहाँ आदि का संबंध समझकर उत्तर दें।
  • उत्तर जांचने पर हाइलाइटेड भागों की सहायता से अपनी त्रुटि पहचानें।
  • TTS सुविधा का उपयोग कर पढ़ने और सुनने दोनों कौशल विकसित करें।

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