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शुक्रवार, 31 जुलाई 2026

कैफ़े सात्विक : वाचन की प्रयोगशाला

INDICOACH • IGCSE HINDI 0549 • READING + WRITING LAB
Reading Lab

सस्वर वाचन, वाचन की शुद्धता, पठन-बोध और लेखन अभ्यास भी... अब तीनों को एक ही अध्ययन यात्रा में अभ्यास कीजिए।

🎙️ वाचन अभ्यास📖 अभ्यास 1 • 9 अंक ✍️ अभ्यास 5 • 15 अंक📱 Mobile-first

आज की अध्ययन यात्रा

पहले आलेख को सस्वर पढ़िए। आपकी ध्वनि का लिखित रूपांतरण नीचे दिखाई देगा। फिर पठन-बोध के 9 अंकों के आलेख से संबंधित अभ्यास प्रश्न और अंत में अभ्यास 4 हेतु लेखन का अभ्यास कर सकेंगे।

ध्यान दें: ब्राउज़र की वाक्-पहचान कभी-कभी सही बोले गए शब्द को भी अलग पहचान सकती है। इसलिए “गलत” के बजाय यहाँ “मूल पाठ से मेल नहीं” माना गया है।

🎙️ चरण 1 — सस्वर वाचन चुनौती

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आलेख शब्द0
स्थितितैयार

‘कैफ़े सात्विक’ - जहाँ भोजन के साथ घर का स्वाद भी परोसा जाता है।

महानगरों में रेस्तरां की कमी नहीं है। कहीं विदेशी व्यंजनों का आकर्षण है, तो कहीं नए स्वाद और आकर्षक सजावट ग्राहकों को बुलाती है। इसी भीड़ के बीच हेमंत कुमार और उनकी पत्नी रीमा ने तीन वर्ष पहले ‘सात्विक’ नाम से एक छोटा-सा रेस्तरां शुरू किया। उनका उद्देश्य केवल भोजन बेचना नहीं था। वे लोगों को उस घरेलू भोजन से फिर जोड़ना चाहते थे, जो व्यस्त जीवन में धीरे-धीरे हमारी थाली से दूर होता जा रहा है।

इस विचार की शुरुआत उनके अपने घर से हुई। हेमंत नौकरी के कारण कई वर्षों तक अलग-अलग शहरों में रहे। बाहर का स्वादिष्ट भोजन आसानी से मिल जाता था, लेकिन कुछ समय बाद उन्हें माँ के हाथ की साधारण दाल, मौसमी सब्ज़ी और ताज़ी रोटी की याद आने लगती। दूसरी ओर, रीमा ने देखा कि उनके आसपास रहने वाले अनेक विद्यार्थी और कामकाजी युवा समय की कमी के कारण अक्सर तैयार या बाहर के भोजन पर निर्भर रहते थे। दोनों ने सोचा कि क्यों न ऐसा स्थान बनाया जाए जहाँ भोजन रेस्तरां में मिले, लेकिन उसका आधार घरेलू रसोई हो।

‘सात्विक’ की रसोई में इसलिए बहुत लंबी भोजन-सूची नहीं रखी गई है। यहाँ व्यंजन मौसम और उपलब्ध सामग्री के अनुसार बदलते रहते हैं। गर्मियों में लौकी, तोरई, ककड़ी और छाछ जैसे हल्के विकल्प अधिक दिखाई देते हैं, जबकि सर्दियों में बाजरे की रोटी, हरी सब्ज़ियाँ और तिल से बने व्यंजनों को स्थान मिलता है। रीमा का मानना है कि घरेलू भोजन की विशेषता केवल उसके स्वाद में नहीं, बल्कि स्थानीय और मौसमी सामग्री के समझदारी से उपयोग में भी है।

रेस्तरां की एक और विशेषता है—‘दादी-नानी की थाली’। हर महीने ग्राहकों से उनके परिवार के किसी पारंपरिक व्यंजन की विधि माँगी जाती है। चुनी गई विधि को आवश्यक सुधार के बाद कुछ दिनों के लिए भोजन-सूची में शामिल किया जाता है। कभी राजस्थान की बाजरे की खिचड़ी आती है, तो कभी बिहार का सत्तू पराठा या महाराष्ट्र की पिठला-भाकरी। इससे कई ऐसे व्यंजन नई पीढ़ी तक पहुँच रहे हैं जो परिवारों की रसोई तक सीमित होते जा रहे थे।

हेमंत के अनुसार घरेलू भोजन को केवल स्वास्थ्य से जोड़ना भी उचित नहीं है। भोजन हमारी स्मृतियों और संबंधों का हिस्सा है। किसी विशेष पकवान की खुशबू हमें बचपन, त्योहार या परिवार के किसी सदस्य की याद दिला सकती है। शायद इसी कारण ‘सात्विक’ में आने वाले कुछ ग्राहक कहते हैं कि यहाँ उन्हें केवल पेट भरने का भोजन नहीं, बल्कि घर से जुड़ने का अनुभव मिलता है।

फिर भी हेमंत और रीमा परंपरा को ज्यों-का-त्यों बनाए रखने के पक्ष में नहीं हैं। वे कम तेल, संतुलित मात्रा और आज की जीवन-शैली के अनुसार कुछ बदलाव करते हैं। उनका विश्वास है कि परंपरा तभी जीवित रहती है जब वह नए समय के साथ संवाद करती रहे।

‘सात्विक’ की कहानी बताती है कि आधुनिक जीवन में घरेलू भोजन का अर्थ केवल घर में बना खाना नहीं है। यह स्थानीय सामग्री, पारिवारिक स्मृतियों और पीढ़ियों से चले आ रहे ज्ञान को सँभालने का एक माध्यम भी हो सकता है। तेज़ी से बदलती भोजन-संस्कृति के बीच शायद हमारी साधारण-सी थाली में ही ऐसी बहुत-सी बातें छिपी हैं जिन्हें बचाए रखना आवश्यक है।

आपने जो पढ़ा — Live Transcript

वाचन शुरू करने पर आपकी आवाज़ का लिखित रूप यहाँ दिखाई देगा…।
आपके ब्राउज़र में Hindi Speech Recognition उपलब्ध नहीं दिख रही। आलेख और बाकी अभ्यास फिर भी काम करेंगे। Chrome/Edge में microphone अनुमति देकर पुनः प्रयास किया जा सकता है।

📊 चरण 2 — Reading Accuracy Report

समय
अनुमानित शुद्धता
मेल खाते शब्द
पुनः अभ्यास
कैसे पढ़ें: लाल लहरदार रेखा = मूल पाठ से मेल नहीं; काटा हुआ लाल = संभावित छूटा शब्द; बैंगनी बिंदीदार = अतिरिक्त/अलग शब्द।

तुलना

🎯 मेरे कठिन शब्द

रिपोर्ट बनने पर शब्द यहाँ आएँगे।

📝 चरण 3 — अभ्यास 1: वाचन-बोध

कुल 9 अंक: 5 × 1 अंक + 2 × 2 अंक। उत्तर संक्षिप्त बिंदु/वाक्यांश में दीजिए।

आलेख दोबारा देखें
1. हेमंत को दूसरे शहरों में रहते हुए किस भोजन की याद आती थी?[1]
✓ माँ के हाथ की साधारण दाल / मौसमी सब्ज़ी / ताज़ी रोटी
2. अनेक विद्यार्थी और कामकाजी युवा बाहर के भोजन पर क्यों निर्भर रहते थे?[1]
✓ समय की कमी
3. ‘सात्विक’ में व्यंजन किन बातों के अनुसार बदलते हैं?[1]
✓ मौसम और उपलब्ध सामग्री
4. ‘दादी-नानी की थाली’ के लिए व्यंजनों की विधियाँ कहाँ से प्राप्त की जाती हैं?[1]
✓ ग्राहकों / उनके परिवारों से
5. कुछ ग्राहकों को ‘सात्विक’ में भोजन करने पर कैसा अनुभव होता है?[1]
✓ घर से जुड़ने का अनुभव
6. ‘दादी-नानी की थाली’ से पारंपरिक व्यंजनों को कौन-से दो लाभ हो रहे हैं?[2]
✓ नई पीढ़ी तक पहुँच
✓ लुप्त/सीमित होते पारंपरिक व्यंजनों का संरक्षण
7. हेमंत और रीमा पारंपरिक भोजन को आधुनिक जीवन के अनुकूल बनाने के लिए कौन-से दो बदलाव करते हैं?[2]
✓ कम तेल का प्रयोग
✓ संतुलित मात्रा

🌉 आपने पढ़ा और समझा। अब अपनी बात लिखिए।

‘सात्विक’ ने घरेलू भोजन को स्वास्थ्य, स्मृति, संस्कृति और बदलती जीवन-शैली से जोड़ा। अब इन्हीं विचारों को दोहराने के बजाय अपना दृष्टिकोण विकसित कीजिए।

✍️ चरण 4 - अभ्यास 5: Writing Studio

आज के युवाओं के लिए घरेलू भोजन का महत्त्व

आपके विद्यालय की छात्र-पत्रिका में इस विषय पर विशेषांक प्रकाशित किया जा रहा है। 120–160 शब्दों में एक लेख लिखिए।

अपने लेख में शामिल करें:
• युवा बाहर के भोजन की ओर अधिक आकर्षित क्यों होते हैं?
• घरेलू और पारंपरिक भोजन का महत्त्व क्या है?
• युवाओं को ऐसे भोजन से दोबारा जोड़ने के लिए क्या किया जा सकता है? • आपका अपना कोई घरेलू भोजन क्या हो सकता है?
शब्द: 0 / 120–160

W1–W4 Self-Review

W1
W2
W3
W4

Model Response — सीखने के लिए

W4 आज की तेज़ जीवन-शैली में युवाओं के लिए बाहर का भोजन सुविधाजनक और आकर्षक लगता है। नए स्वाद, विज्ञापन और समय की कमी भी उन्हें इसकी ओर खींचते हैं। फिर भी घरेलू भोजन का महत्त्व केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है।

W1 घर का भोजन स्थानीय और मौसमी सामग्री से जुड़ा होता है तथा परिवार की परंपराओं को आगे बढ़ाता है। किसी परिचित व्यंजन का स्वाद हमें अपने परिवार और संस्कृति की याद भी दिला सकता है। W2 इसलिए नई पीढ़ी को पारंपरिक भोजन से जोड़ने के लिए केवल उपदेश देना पर्याप्त नहीं है।

W2 यदि में अपने घर के किसी पारंपरिक एवं स्थानीय भोजन की बात करूँ तो वह दाल-पकवान हो सकता है। यह हम पारसी समुदाय का घरेलू और विशेष अवसरों पर बनाया जाना वाला खाद्य पदार्थ है।

W3 विद्यालयों में पारंपरिक व्यंजन दिवस आयोजित किए जा सकते हैं, परिवार बच्चों को कोई पुरानी विधि बनाना सिखा सकते हैं और रेस्तरां घरेलू व्यंजनों को आधुनिक ढंग से प्रस्तुत कर सकते हैं। इस प्रकार सुविधा और परंपरा के बीच संतुलन बनाकर घरेलू भोजन को नई पीढ़ी के लिए फिर प्रासंगिक बनाया जा सकता है।

🏁 SATVIK — My Learning Report

Reading Time
Reading Accuracy
अभ्यास 19 अंक
Writing0 शब्द
R1
स्पष्ट जानकारी
R2
विचारों का संबंध
R3
विवरण पहचानना
R4
निहित अर्थ
याद रखें: प्रभावी पठन केवल तेज़ पढ़ना नहीं है। लक्ष्य है—गति + शुद्धता + समझ

मंगलवार, 26 नवंबर 2024

समीक्षा: प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ (पुस्तक)

आपने हाल ही में एक पुस्तक पढ़ी थी, जो आपको बहुत पसंद आई उसके बारे में आपको अपने मित्रों को बताना है उसकी समीक्षा लिखिए करते हुए बताइए कि आपको यह पुस्तक विशेष रूप से क्यों पसंद आई। अपने लेखन में आप निम्नलिखित बिंदुओं को सामिल करते हुए (IGCSE-200) / (IBDP-450) शब्दों में 'पुस्तक समीक्षा' लिखिए। 
      • पुस्तक का सारांश 
      • पुस्तक के गुण और दोष 
      • आपकी राय 
आदर्श उत्तर - (IGCSE हेतु 200 शब्दों में)
दिनांक: 15-नवं. 202X 

पुस्तक समीक्षा:  प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ

      • पुस्तक का नाम: प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ   
      • लेखक: मुंशी प्रेमचंद  
      • प्रकाशन: राजपाल एंड संस, दिल्ली
      • मूल्य: ₹150 (संकेतात्मक)  
      • पृष्ठ संख्या: 200  
पुस्तक का सारांश:
प्रेमचंद की कहानियों का यह संग्रह भारतीय समाज और मानवीय संवेदनाओं का अद्वितीय चित्रण करता है। इसमें "ईदगाह," "पंच परमेश्वर," "नमक का दरोगा," और "कफन" जैसी प्रसिद्ध कहानियां शामिल हैं। इन कहानियों में प्रेमचंद ने गरीबी, नैतिकता, रिश्तों और सामाजिक असमानताओं को सरल और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया है। हर कहानी एक महत्वपूर्ण संदेश और गहरी सीख प्रदान करती है।  

पुस्तक के गुण और दोष:
इस पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता है इसकी भाषा की सरलता और पात्रों की यथार्थता। प्रेमचंद ने समाज की समस्याओं और मानवीय कमजोरियों को इतनी गहराई से प्रस्तुत किया है कि पाठक पात्रों और उनके संघर्ष से स्वयं को जुड़ा हुआ महसूस करता है। हालांकि, कुछ कहानियों में पुरानी हिंदी का प्रयोग आधुनिक पाठकों को कठिन लग सकता है।  

पुस्तक क्यों पसंद आई:
यह पुस्तक इसलिए विशेष रूप से पसंद आई क्योंकि यह न केवल समाज की वास्तविकताओं को दर्शाती है, बल्कि उसमें सुधार के लिए प्रेरित भी करती है। कहानियों में मानवीय संबंधों और संवेदनाओं का चित्रण पाठकों को आत्मविश्लेषण के लिए प्रेरित करता है।  

पुस्तक पढ़ने की सिफारिश (अनुशंसा):
यह पुस्तक साहित्य प्रेमियों और समाज के यथार्थ को समझने वालों के लिए अनमोल है। यह न केवल मनोरंजन करती है, बल्कि पाठकों को जीवन और समाज के प्रति एक नई दृष्टि भी प्रदान करती है।

समीक्षक: [आपका नाम]

आदर्श उत्तर (IBDP हेतु 450 शब्दों में)

दिनांक: 15-नवं. 202X
पुस्तक समीक्षा: प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ 
  • पुस्तक का नाम: प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ   
  • लेखक: मुंशी प्रेमचंद  
  • प्रकाशन: राजपाल एंड संस  
  • मूल्य: ₹150 (संकेतात्मक)  
  • पृष्ठ संख्या: 200  
पुस्तक का सारांश:
प्रेमचंद की यह कहानी-संग्रह भारतीय समाज और मानवीय संवेदनाओं का दर्पण है। "ईदगाह," "पंच परमेश्वर," "नमक का दरोगा," और "कफन" जैसी कहानियां इस संग्रह की प्रमुख रचनाएं हैं। ये कहानियां गरीबी, ईमानदारी, न्याय और मानवीय रिश्तों की गहराई को छूती हैं। उदाहरण के लिए, "ईदगाह" में छोटे हामिद का अपनी दादी के प्रति प्यार और त्याग दिखाया गया है। "पंच परमेश्वर" न्याय और सच्चाई की अहमियत सिखाती है, जबकि "नमक का दरोगा" ईमानदारी के मूल्य को उजागर करती है। "कफन" गरीबी और नैतिक पतन पर तीखा प्रहार करती है।  

पुस्तक के गुण अथवा दोष:
प्रेमचंद की लेखनी की सबसे बड़ी खूबी उनकी सरल भाषा और यथार्थवादी दृष्टिकोण है। उनकी कहानियों के पात्र और स्थितियां आम जीवन से ली गई लगती हैं। उनके माध्यम से सामाजिक समस्याओं और मानवीय कमजोरियों को बेहद प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है।  
हालांकि, कुछ स्थानों पर कहानियों की धीमी गति और पुरानी भाषा आधुनिक पाठकों को चुनौतीपूर्ण लग सकती है।  

पुस्तक पसंद आने का कारण: 
यह पुस्तक मुझे इसलिए पसंद आई क्योंकि इसमें हर कहानी जीवन का एक मूल्यवान सबक देती है। यह न केवल समाज की सच्चाई को सामने रखती है, बल्कि हमें आत्मविश्लेषण और सुधार के लिए प्रेरित करती है।  

कहानियों की सीख का मेरे अनुभवों से मेल: 
प्रेमचंद की कहानियों ने मुझे मेरे जीवन के कई अनुभवों से जोड़ने का अवसर दिया। उदाहरण के लिए, "ईदगाह" पढ़ते समय मुझे अपने बचपन का वह समय याद आया जब मैंने अपनी मां के लिए पहली बार कुछ खरीदा था। हामिद की तरह, उस दिन मैंने पैसे से ज्यादा भावनाओं को महत्व दिया था।  
"पंच परमेश्वर" ने मुझे एक घटना की याद दिलाई जब मुझे दोस्तों के बीच न्याय करना था। प्रेमचंद की इस कहानी ने सिखाया कि न्याय हमेशा सच्चाई पर आधारित होना चाहिए, भले ही फैसला अपनों के खिलाफ क्यों न हो।  
"नमक का दरोगा" से मैंने सीखा कि ईमानदारी के रास्ते पर चलना मुश्किल हो सकता है, लेकिन यह हमेशा सम्मान और आत्मसंतुष्टि देता है। मेरी नौकरी के शुरुआती दिनों में, मैंने भी कई बार ईमानदारी के साथ अपने काम को प्राथमिकता दी, भले ही परिस्थितियाँ प्रतिकूल रहीं।  
"कफन" ने मुझे गरीबी और उसके प्रभावों को गहराई से समझने का अवसर दिया। मैंने अपने आस-पास ऐसे लोगों को देखा है जो कठिन परिस्थितियों में भी मानवीयता बनाए रखते हैं, जबकि कुछ लोग मजबूरी में नैतिकता से समझौता करते हैं।  

पुस्तक पढ़ने की अनुशंसा:
प्रेमचंद की यह पुस्तक हर व्यक्ति को पढ़नी चाहिए, क्योंकि यह जीवन और समाज की सच्चाइयों को गहराई से समझने का अवसर देती है। यह न केवल पाठकों को प्रेरित करती है, बल्कि उन्हें समाज और मानवीय मूल्यों के प्रति संवेदनशील भी बनाती है।

समीक्षक: [आपका नाम]

👉अब आप इसी प्रकार अपने द्वारा पढ़ी गई किसी भी पुस्तक की समीक्षा लिखने में सक्षम हो सकेंगे 

अन्य सहायक सामग्री -

सोमवार, 27 फ़रवरी 2023

रेस्तराँ (restaurant) की समीक्षा

एक रेस्तरां की समीक्षा में निम्नलिखित बातें शामिल की जानी चाहिए:

  1. रेस्तरां का नाम और वहाँ की सुविधाएँ जैसे कि स्थान, वातावरण, सेवा आदि।
  2. भोजन की गुणवत्ता, स्वाद और मूल्य।
  3. कैसे रेस्तरां की सेवा थी? क्या ऑर्डर समय पर उपलब्ध हुआ था? 
  4. क्या स्टाफ ने आपके सभी सवालों का जवाब दिया और उनकी आपके प्रति सेवा कैसी थी?
  5. भोजन के दौरान आपका अनुभव कैसा रहा?
  6. आपको अपने भोजन का स्वाद और परोसने का ढंग दोनों ही पसंद आये?
  7. रेस्तरां में खाद्य पदार्थों के मूल्य के सम्बन्ध में आपकी राय क्या है?
  8. भोजन के स्वादिष्ट, गुणवत्ता मे अच्छा और स्वास्थ्यवर्धक था?  
  9. रेस्तरां द्वारा बताये गए मूल्य में कोई छूट अथवा ऑफर उपलब्ध कराये गए?
  10. क्या आप अपने मित्रों और परिवार में इस रेस्तरां की अनुसंशा /सुझाव देंगे।

इनके अतिरिक्त, आप रेस्तरां में किसी भी विशेष संदर्भ के साथ जुड़े अपने अनुभवों को भी समीक्षा में शामिल कर सकते हैं।

अभ्यास प्रश्न 

हाल ही आपके घर के पास में एक नया हॉटेल / रेस्तरां (Restaurant) खुला है। अपने किसी मित्र/सहेली को इस  रेस्तरां की समीक्षा करते हुए एक ई-मेल/पत्र  लिखकर बताइये कि रेस्तरां के बारे में आपकी क्या राय है? 

आपके ई-मेल में निम्नलिखित बातें सम्मिलित होनी चाहिए।

  1. रेस्तरां का विवरण (आंतरिक और बाहरी सज्जा), सेवाएँ (बैठने का स्थान, माहौल, पार्किंग आदि।) 
  2. आपने अपने खाने में क्या मंगवाया?
  3. रेस्तरां के बारे में आपके व्यक्तिगत विचार और अनुसंशा 

आपका ई-मेल लगभग 120 शब्दों में होना चाहिए। आपको 3 अंक अंतर्वस्तु के लिए और 5 अंक सटीक भाषा एवं शैली के लिए दिए जाएंगे। 

                                                                                                                           सौजन्य: गूगल इमेज 

उत्तर - मेरे घर की पास खुले नए रेस्तरां की समीक्षा 

प्रेषक : mani121@zmail.com

प्रति :  myfriend@indicoach.com 

विषय: मेरे विषय घर की पास खुले नए रेस्तरां के संदर्भ में ... ।

प्रिय सहेली/मित्र [नाम], 

नमस्ते ,

तुम्हें यह बताते हुए मुझे बड़ी खुशी हो रही है कि हाल ही में मेरे घर के पास में "बरेसा" नाम का एक नया रेस्तरां खुला है। मैं अपने परिवार के साथ कल शाम को वहाँ गयी थी। मैंने जो अनुभव किया है वह अप्रतिम था। अतः मैं आपको इसके बारे में अपनी राय (opinion) देना चाहती हूं।

यह रेस्तरां नए होने के बावजूद भी बहुत विस्तृत है और अपनी सराहनीय सुविधाओं के लिए भविष्य में जाना जाएगा। उसमें एक बड़ा डाइनिंग हॉल है जहाँ आप अपने दोस्तों और परिवार के साथ आराम से बैठकर भोजन कर सकते हैं। रेस्तरां की वातावरण बहुत ही सुखद (cozy) और आरामदायक (comfortable) है और खाते समय ऐसा लगता है कि आप यहाँ अपने खाने का आनंद प्रकृति की गोद में बैठकर ले रहे हैं।

मैंने अपने भोजन में विभिन्न सब्जियों सहित कॉर्न-क्रिस्पी, शाही टुकड़े, मशरूम मटर पनीर और ताजा रसियन सलाद आदि मंगवाया था। सब्जियाँ और पनीर बहुत ही स्वादिष्ट थे और ताजा सलाद भी बहुत ही स्वादिष्ट था। मशरूम-मुटर-पनीर भी बहुत ही स्वादिष्ट था और उसमें हरे मटर के साथ पनीर की मधुरता बहुत अच्छी थी। शाही टुकड़े और सबुदाने की खीर का स्वाद तो लाजवाब था और आमतौर पर बहुत ही पसंद की जाने वाली मिठाइयाँ है। निरामिष (vegetarian) के साथ ही सामिष (मांसाहारी) भोजन प्रेमियों के लिए भी यहाँ निराशा न होगी। यहाँ भोजन के साथ आप सुमधुर संगीत (melodious music) का भी आनंद (joy) उठा सकते हैं।  

बाहर पार्किंग और बच्चों के खेलकूद के लिए फूलों से सजा मनमोहक बगीचा भी है। मैं चाहूंगी कि तुम एक बार इस रेस्तरां का आनंद अवश्य लो। मुझे खुशी होगी कि मैं भी तुम्हारे साथ चल सकूँ...।

      तुम्हारी सहेली

[आपका नाम] 

संलग्न (Attachments): रेस्तरां और वहाँ के भोजन की कुछ छवियाँ।



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