अभिभावक के विचार

A — मि. नायडू (होमवर्क के समर्थक):

मेरा मानना है कि गृहकार्य बच्चे को रोज़ अभ्यास में लगाए रखता है। स्कूल में सीखी हुई बातों को यदि उसी दिन घर पर दोहराया न जाए तो वह भूलने की संभावना बढ़ जाती है। हर पाठ के बाद नियमित लिखित अभ्यास दिमाग में स्थायित्व लाता है। प्रोजेक्ट आधारित कार्य आकर्षक होते हैं, पर वे कभी-कभी टीम-डिपेंडेंट और समय-खाऊ हो जाते हैं, और रोज़ाना पुनरावृत्ति का विकल्प नहीं बन सकते।

B — मिसेज मलिक (प्रोजेक्ट के समर्थक):

मैं प्रोजेक्ट आधारित शिक्षा की हिमायत करती हूँ। बच्चों को आज शोध, समस्या-समाधान, प्रस्तुति और सहकार्यता जैसी जीवन-योग्यताएँ चाहिए — जो नियमित होमवर्क से नहीं मिल पाती। प्रोजेक्ट प्रक्रिया उन्हें सोचने, खोजने और बनाकर साझा करने का अनुभव देती है; जबकि केवल किताब-आधारित अभ्यास 'याद करो और लिखो' तक सीमित रह सकता है।

C — मो. आबिद (संतुलन के समर्थक):

मेरी राय में दोनों का संतुलन आवश्यक है। केवल होमवर्क देने से बच्चे बोझ महसूस करते हैं और रटने की आदत पड़ती है, जबकि केवल प्रोजेक्ट देने से बुनियादी भाषा और गणना जैसी मूल दक्षताओं का अभ्यास कम हो जाता है। रोज़ की थोड़ी पुनरावृत्ति और समय-समय पर सोच आधारित प्रोजेक्ट — यही संयोजन टिकाऊ सीखने का तरीका है।

D — मि. जेकब (गुणवत्ता के समर्थक):

इस बहस का असली पहलू "गुणवत्ता" है, न कि केवल "रूप"। बहुत-सा होमवर्क केवल पन्ने भरने की औपचारिकता बन जाता है — उसमें सीख कहाँ है? कई बार प्रोजेक्ट भी माता-पिता द्वारा पूरा कर दिया जाता है और विद्यार्थी उसकी सार्थकता खो देते हैं। यदि होमवर्क सारयुक्त हो और प्रोजेक्ट विद्यार्थी-केन्द्रित हों, तभी दोनों का समन्वय उपयोगी होगा।

📖 निर्देश: नीचे दिए कथनों (1–9) में प्रत्येक कथन के लिए चुनिए कि किस अभिभावक (A–D) ने वह राय व्यक्त की थी। चयन के बाद अपना स्कोर देखें।

💡 शैक्षिक दृष्टिकोण

होमवर्क: नियमित अभ्यास, अवधारणाओं का सुदृढ़ीकरण। प्रोजेक्ट: रचनात्मकता, सहयोग और वास्तविक दुनिया कौशल। संतुलन आवश्यक है।