शुक्रवार, 31 मार्च 2023

प्रतिवेदन (Report) लेखन

"किसी घटना, कार्य-योजना, समारोह अथवा शोध आदि के बारे में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से देखकर या छानबीन करके तैयार की गई लिखित सामग्री को 'प्रतिवेदन' (रिपोर्ट) कहते हैं।"

प्रतिवेदन को अंग्रेजी में 'रिपोर्ट' के नाम से जानते हैं। यह एक लिखित विवरण होता है जो किसी घटना, स्थिति या समस्या के बारे में सार्वजनिक अथवा गोपनीय सूचना देने के लिए लिखा जाता है। यह रिपोर्ट उस संगठन, संस्था, या अन्य संबंधित पक्ष द्वारा इस घटना की जानकारी साझा करने अथवा समस्या को हल करने के लिए उचित कदमों को उठाने में मदद करता है। प्रतिवेदन आमतौर पर व्यवसाय, शिक्षा, सरकार, और अन्य संगठनों द्वारा उपयोग किया जाता है। 

हम कह सकते हैं कि 'प्रतिवेदन (रिपोर्ट) लेखन एक ऐसी विधि है जिसमें लेखक किसी घटना, उत्पाद या सेवा के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करने का प्रयास करता है। यह जानकारी किसी विशिष्ट विषय के बारे में होती है जैसे कि कोई कार्यक्रम, घटना, दुर्घटना, नीति, प्रकल्प, उत्पाद विकसित करने के बारे में रिपोर्ट लिखा जाता है। 

प्रतिवेदन (रिपोर्ट) लेखन में सामान्यतया इस्तेमाल किए जाने वाले तकनीकी शब्दों का उपयोग किया जाता है। इसके लेखन का मुख्य उद्देश्य जानकारी का सही और सुगम तरीके से संचार करना होता है।

रिपोर्ट लिखने का प्रारूप : - 

  1. शीर्षक: रिपोर्ट का शीर्षक देखने वाले को आपके रिपोर्ट का मुख्य विषय पता चल जाता है।
  2. रिपोर्ट लिखने वाले का नाम: रिपोर्ट के प्रारंभ में रिपोर्ट लिखने वाले व्यक्ति (आपका नाम) का नाम उल्लेख करना चाहिए।
  3. तारीख: रिपोर्ट लिखने की तारीख दर्शाना आवश्यक है।
  4. संक्षिप्त सारांश (प्रस्तावना): रिपोर्ट के मुख्य विषय, मुख्य संदेश और मुख्य निष्कर्ष को संक्षिप्त में दर्शाना चाहिए।
  5. विस्तृत विवरण: रिपोर्ट के अंतर्गत विषय से संबंधित जानकारी के बारे में काल-क्रमानुसार सविस्तार लिखना चाहिए।
  6. संदर्भ: यदि आपने उपयोग की गई संदर्भ पुस्तकें, जानकारी, अध्ययन आदि का उल्लेख करना चाहिए।
  7. निष्कर्ष और सुझाव: रिपोर्ट के अंत में आपका निष्कर्ष और उन सुझावों को दर्शाना चाहिए जो समस्या को हल करने में मदद करें।
साभार - www.hindi0549.com

अभ्यास कार्य  -
 
अभ्यास 1 - कल रात आपने अपने क्षेत्र में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए। जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6 थी। किसी के हताहत होने अथवा कहीं कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ। इस घटना का  एक प्रतिवेदन (रिपोर्ट) लगभग 150 शब्दों में लिखिए।

उत्तर - शीर्षक - भूकंप से दहली धरती
________ (आपका नाम),
दिनांक : XX माह, 20XX
  
कल रात मुझे अपने क्षेत्र गांधी नगर में एक भूकंप के हल्के झटके महसूस हुए। जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6 थी। यह भूकंप मध्य रात्रि में आया था। विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि इसमें किसी व्यक्ति को कोई चोट नहीं पहुंची है और कोई भी जान-माल का नुकसान नहीं हुआ है।
भूकंप से गिरे मकान  

        भूकंप के बाद, लोग डर से थोड़े सहमें लग रहे थे, लेकिन जल्द ही वे सामान्य रूप से अपनी गतिविधियों में वापस लौट गए। अधिकतर लोग घरों में ही रहे थे और कुछ लोगों ने उनके बाहर जाने से पहले ध्यान दिया कि उनके घरों के अंदर चीजें सुरक्षित हैं या नहीं?

        स्थानीय अधिकारियों ने भूकंप के बाद स्थिति का निरीक्षण किया और बताया कि हमारे यहाँ जान-माल का कोई विशेष नुकसान नहीं हुआ है। वे लोगों को सलाह दे रहे हैं कि वे अपने घरों में ही रहें और बहुत जरूरी होने पर ही बाहर निकलें। इस भूकंप से लोगों में थोड़े डर और दहशत का माहौल है, लोग हर समय अगले भूकंप के आने के इंतजार में बैठे रहते हैं। बताते चल कि भूकंप के आने के बाद अथवा उसके दौरान ही नुकसान संभव होता है, वो भी तब जब उसकी तीव्रता अधिक हो। उसके आने की कोई सटीक सूचना दे पाना संभव नहीं है।  
अतः आम जनता से निवेदन है कि सतर्क रहे, सावधान रहे, अपने और अपने परिवार की सुरक्षा का ख्याल रखें।  धन्यवाद। 

अभ्यास 2 

आपके विद्यालय में कल वार्षिकोत्सव (Annual day function) मनाया गया। समाचार पत्र में छपवाने के लिए उसकी एक प्रतिवेदन (रिपोर्ट) लेखन कीजिए। आपके लेखन में निम्नलिखित बिन्दु अवश्य शामिल होने चाहिए। आपका लेखन कार्य 200 शब्दों तक सीमित होना चाहिए। 
  1. उत्सव का स्थान, दिनांक और समय
  2. उत्सव में हुए कार्यक्रमों की जानकारी 
  3. उत्सव में आपकी भूमिका और अनुभव
आपको उचित विषय वस्तु के लिए 8 अंक तथा उचित भाषा के लिए 8 अंक मिल सकते हैं। 

साभार - गूगल इमेज 
उत्तर - हिंदवी अंतर्राष्ट्रीय विद्यालय, यवतमाल का वार्षिकोत्सव हर्षोल्लास से सम्पन्न
यवतमाल के 'हिंदवी अंतर्राष्ट्रीय विद्यालय' में कल दिनांक 30 मार्च 20XX को शाम को वार्षिकोत्सव मनाया गया। कार्यक्रम में संस्था संस्थापक श्री बाजीराव पाटील ने मुख्य अतिथि सिने कलाकर नाना पाटेकर और उद्योगपति श्री अनुपम गुप्ता के साथ मिलकर माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप-प्रज्ज्वलन के साथ वार्षिकोत्सव कार्यक्रम की शुरुवात की। उसके बाद प्राथमिक कक्षा के विद्यार्थियों ने सरस्वती वंदना समूहिक गीत के माध्यम से प्रस्तुति दी। सभी अतिथियों और अभिभावकों के सभागार में आ जाने के बाद कार्यक्रम प्रारंभ हुआ।
      
कार्यक्रम में विद्यालय के सभी बच्चों ने बड़े ही उत्साह के साथ भाग लिया। सर्वप्रथम कक्षा 10वीं के विद्यार्थियों द्वारा देश के शहीदों की याद में एक नाटक प्रस्तुत किया गया। दर्शक उनकी संवाद कुशलता और अभिनय के लिए तालियों से उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया। कक्षा 9वीं और 8वीं का सामूहिक नृत्य की सुमधुर प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।      
        
        तदनंतर कक्षा 6वीं और 7 वीं के विद्यार्थियों ने फिल्मी गीतों पर आधारित अंत्याक्षरी से समां बांधा। उन्होने बड़े ही उत्साह से एक दूसरे के हराने के चक्कर में इतने अच्छे-अच्छे गीत सुनाये कि दर्शक भी उनके साथ लय में लय मिलाते गीत गुनगुनाते नजर आए। 

अंत में अतिथियों के हाथों मेधावी छात्र-छात्राओ का सम्मान स्मृति-चिह्न और प्रमाण-पत्र देकर से किया गया।  फिर राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ। सभी ने बड़े ही हर्षोल्लास के साथ इस सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। 

 
अभ्यास प्रश्न 3.
आपके विद्यालय में आज सांसद निधि से एक नए खेल के मैदान का उद्घाटन हुआ है। इस कार्यक्रम का प्रतिवेदन (रिपोर्ट) लेखन कीजिए। अपने लेखन में आप निम्नलिखित मुद्दों को अवश्य शामिल करें। 
  1. खेल का मैदान न रहने से बच्चों को समस्या होती थी। 
  2. सांसद जी ने अपने हाथों से इस मैदान का उद्घाटन किया। 
  3. विद्यालय को नया खेल का मैदान मिलने से बच्चों पर होने वाला प्रभाव क्या होगा?   
आपका लेखन कार्य 200 शब्दों से अधिक न हो। आपको उपयुक्त विषय-वस्तु के लिए 3 अंक और सही भाषा-शैली के लिए 5 अंक मिलेंगे। 
उत्तर - आज पुणे के शिवाजी रोड स्थित, नवोदय विद्यालय में सांसद निधि से वित्तपोषित एक नए खेल के मैदान का उद्घाटन किया गया। इस उद्घाटन में विद्यालय के प्रधानाचार्य जी श्री नीरज कुमार ने हमारे माननीय सांसद श्री सतीश केवट को पुष्पगुच्छ, शाल और श्रीफल देकर उनका स्वागत किया। फिर सांसद महोदय ने अपने  कर-कमलों से हमारे नए खेल के मैदान का उद्घाटन किया गया। सभी बच्चों ने इस अवसर पर तालियाँ बचाकर खुशियाँ जताई। दरअसल  पहले, विद्यालय के बच्चों के लिए कोई खेल का मैदान नहीं था, जिससे वे बहुत दुःखी रहते थे। लेकिन सांसद जी की मेहनत और उनके संसाधनों से नया मैदान उपलब्ध हो गया है। अब बच्चों को खेलने का उचित अवसर व स्थान मिल सकेगा और उनके मानसिक के साथ-साथ शारीरिक विकास को भी बल मिलेगा। वे तरह-तरह के खेल पाएँगे। 
                                                                                     साभार - Image by upklyak on Freepik 
इस मैदान से विद्यालय के बच्चों पर सकारात्मक प्रभाव होगा। वे अब खेल का मैदान मिलने से न तो केवल खुश होंगे, बल्कि ये मैदान उनके शारीरिक विकास में भी अहम भूमिका निभाएगा। इसके अलावा, बच्चों की मनोदशा भी खुशहाल होगी।

संक्षिप्त में कहा जाए तो, इस उद्घाटन कार्यक्रम से सांसद निधि जी ने विद्यालय के बच्चों को बहुत सम्मानित किया और उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने में बहुत मदद की।

सोमवार, 27 मार्च 2023

दैनंदिनी (डायरी) लेखन

दैनंदिनी को अंग्रेजी में 'डायरी' कहा जाता है। हिंदी में भी अब यही शब्द रूढ हो गया है।  दैनंदिनी लेखन गत-साहित्य की एक प्रमुख विधा है इसमें लेखक आत्म साक्षात्कार करता है। विश्व के लगभग सभी महान व्यक्ति 'डायरी लेखन' करते थे। उनकी डायरी के पन्नों में लिखे अनुभवों से उनके निधन के बाद भी कई लोग उनके आदर्श जीवन की प्रेरणा लेते हैं। कुछ लोग तो दैनंदिनी को मित्र मानते हैं। क्योंकि हम अपने सभी राज जैसे मित्र के साथ साझा करते हैं, वैसे ही हम अपनी लगभग सभी घटनाएँ दिल खोलकर डायरी में लिख देते हैं।   

  मित्रों, आपने अपने घर पर माता-पिता द्वारा दैनिक खर्चो को लिखने की पुस्तिका तो जरूर देखी होगी। वह भी डायरी लेखन का ही रूप है। ठीक वैसे ही दुकानदार अथवा व्यापारी भी अपने खर्चे का हिसाब अपने बही-खातों (अकाउंट बुक) में रखते हैं। नेता तथा उद्यमी अपने रोज की सभाओं (मीटिंग्स) तथा आने-जाने की जानकारी अपनी डायरियों में लिखकर रखते हैं ताकि उनसे कोई महत्त्वपूर्ण कार्य छुट न जाय। इस प्रकार जन साधारण भी अपनी व्यक्तिगत राज, बातें, घटनाएँ, दुर्घटनाएँ आदि को अपनी डायरी में लिख कर रखते हैं। कुछ लोग घटनाओं को यादगार बनाएँ रखने के लिए डायरी लेखन करते हैं। महान लोगों की लिखी डायरियाँ उनकी जीवनी (आत्मकथा) लिखने में बहुत सहयोगी होती है।     

दैनंदिनी (डायरी) की परिभाषा गढ़ते हुए हम कह सकते हैं कि - 

'डायरी लेखन' व्यक्ति के द्वारा लिखा गया व्यक्तिगत विचारों, अनुभवों और भावनाओं को लिखित रूप में अंकित करके संग्रह किया गया साहित्य है।"  

यह एक व्यक्तिगत कार्य होता है जो व्यक्ति के मन को शांत करता है और अपने जीवन को समझने में मदद करता है। इसके अलावा, यह एक रोचक स्रोत भी होता है जो व्यक्ति को उनके अतीत की यादें ताजा करता है और उन्हें अपने भविष्य की योजनाओं के लिए उत्साहित करता है।

दैनंदिनी (डायरी) लेखन के लाभ - 

  • मानसिक शांति - कई उलझनों को केवल डायरी में लिख भर देने से मन को बड़ी शांति मिलती है। 
  • डायरी को बार-बार पढ़ते रहने से स्मरण शक्ति को अधिक कुशाग्र बनाया जा सकता है। 
  • यह सकारात्मक सोचने में मदद करता है तथा तनाव को कम करने में सहायता करता है।
  • जीवन में हुए अच्छे-बुरे पलों को याद रखने में अधिक सक्षम होते हैं।
  • समस्याओं के समाधान तलाशने में भी डायरी काफी कारगर सिद्ध होती है।    
  • संचार कौशल (communication skills) और लेखन कौशल (writing skills) विकसित करने में सहायक है।
  • अपने जीवन को व्यवस्थित रखने में सहायता करता है। 

इसके माध्यम से, व्यक्ति अपनी विचारों और अनुभवों को सुलभता और बेबाकी से व्यक्त कर पाता हैं जो उनकी सोच को अधिक स्पष्ट बनाता है। जीवन को अधिक स्पष्ट और उत्कृष्ट बनाने का उत्तम साधन होता है। 

डायरी लेखन के प्रकार

  1. व्यक्तिगत डायरी - इसमें आप अपने दैनिक जीवन के बारे में लिखते हैं। इसमें आप अपने अनुभवों, भावनाओं, विचारों और दैनिक कार्यों के बारे में लिख सकते हैं।
  2. शिक्षात्मक डायरी - इसमें आप विभिन्न विषयों पर अपनी विचारधारा, अनुभवों, ज्ञान और सीख संबंधित मुद्दों पर लिखते हैं। इससे आप अपनी शिक्षा को आगे बढ़ाने और अपनी स्मृति को बढ़ाने में मदद मिलती है।
  3. वास्तविक डायरी वास्तविक घटनाओं और अनुभवों के बारे में होती है, जो आपके दैनिक जीवन में होते हैं। 
  4. काल्पनिक डायरी इसमें कल्पनाशील घटनाएं और कहानियाँ होती हैं जो कि आपके मन में उत्पन्न होती हैं।
  5. साहित्यिक डायरी - यह एक ऐसी डायरी होती है जिसमें लेखक अपनी रचनाओं, कविताओं, छंदों और अन्य साहित्यिक उत्पादों के बारे में लिखता है। इसमें लेखक अपनी सृजनात्मक प्रक्रिया, लेखन की तकनीक और अन्य साहित्यिक बिंदुओं पर भी विचार करता है। इसमें लेखक अपने लेखन की प्रगति को ट्रैक कर सकता है। 

डायरी लेखन कैसे करें?

    डायरी लिखते समय आपको सबसे पहले अपनी दैनंदिनी (डायरी) का एक नया पाना ले लें। फिर सबसे पहले व स्थान का नाम जहां से आज लिख रहे हो, जैसे - मुंबई, विद्यालय छात्रावास, आदि कोई एक लिखिए। उसके नीचे आज की तारीख, दिन और समय अवश्य लिखें। अगली पंक्ति में प्रिय डायरी का संबोधन लिख सकते हैं, हालाँकि यह लिखना कोई आवश्यक नहीं है। फिर अगली पंक्ति में पूछे गए प्रश्न पर आधारित एक आकर्षक शीर्षक लिख। इससे यह पता चल जाएगा कि आप इसी विषय पर आगे विस्तार में लिखने वाले हैं। 
    विषय विस्तार आप एक नए अनुच्छेद में लिखना हैं। ध्यान रहे कि ये जानकारियाँ आपकी अपनी होने के कारण पूरी घटना की जानकारी आप 'उत्तम पुरुष' में ही लिखें। यथा - मैं, मैंने, मेरा, मेरी, मेरे, मुझको ... आदि।       

    संपूर्ण जानकारी को संक्षेप में प्रारंभ से लेकर अंत तक सभी घटनाओं को उनके काल क्रमानुसार वर्णित कीजिए। जैसे घटना, दुर्घटना, अनुभव, घटनास्थल या घटना से जुड़े व्यक्तियों की सटीक जानकारियाँ एक के बाद एक करके लिखने का प्रयास करें। फिर बता दे कि यह आपकी डायरी का पन्ना है अतः लेखक बतौर आप अपने दुख-दर्द, हँसी-खुशी आदि मनोभावों को विचारों के साथ महत्व देते हुटे लिखेँ। जिससे आपकी सर्वश्रेष्ठ रचनात्मकता और अभिव्यक्ति झलकनी चाहिए। 
      आपका सम्पूर्ण लेख जानकारी से भरा होना चाहिए, आपके लेखन में आपकी बताई जानकारियाँ जीवंत लगनी चाहिए।  ऐसे लिखें कि आप अभी भी उसे वास्तविक घटना का सामना कर रहें हैं। 
        आपकी लेखन शैली मैत्रीपूर्ण और संवादात्मक होनी चाहिए। डायरी में घटना की जानकारी लिख लेने पर आंत में आपका नाम और हस्ताक्षर कर दें। इस प्रकार आपकी डायरी लेखन का यह पाना पूरा हुआ। 

        डायरी  लेखन का प्रारूप - 

        वैसे तो डायरी लेखन का पूर्णतः व्यक्तिगत होता है  जिसे आप आपकी पसंद और आवश्यकताओं के अनुसार अलग-अलग तरीकों से इसे लिख सकते हैं। फिर भी, हम डायरी लेखन के इस प्रारूप को 'आदर्श प्रारूप' के रूप में स्वीकार कर सकते हैं, जिसमें निम्नलिखित बिन्दुओं को शामिल कर सकते हैं: - 

        1. स्थान - घटनाओं का स्थान के साथ सीधा संबंध होता है। एक जैसी घटनाएँ कई बार, कई स्थानों पर घटित हो सकती हैं। उनको अलग-अलग व्यवस्थित याद रखने के लिए स्थान का उल्लेख अनिवार्य है। 
        2. दिनांक - घटनाओं का कालक्रम जानने और उन्हें सिलसिलेवार याद रखने के लिए दिन एवं तिथि अपनी डायरी लेखन में यथा-स्थान अवश्य लिखना चाहिए।  जैसे - 27 मार्च 20XX  अथवा  27 - मार्च - 20XX
        3. दिन -  सोमवार, 27 मार्च 20XX                    अथवा                  सोमवार, 10: 30 बजे रात्रि 
        4. समय - समय का महत्व दिन और तिथि से कहीं अधिक होता है। अतः समय लिखना न भूलें। यथा - समय रात्रि के 10:30 बजे अथवा रात्रि 10 बजकर 30 मिनट पर। 
        5. शीर्षक - डायरी में घटना का शीर्षक देखते ही हमें पूरी की पूरी घटना सविस्तार स्मरण हो जाती है। अतः आपकी डायरी लेखन में शीर्षक का लिखा जाना सम्पूर्ण घटना के मुख्य विषय को दर्शाता है। इसे लिखने से डायरी लेखन में थोड़ा सा अंतर लाया जा सकता है। शीर्षक डायरी में  लिखे गए ज्ञान का सार होता है। शीर्षक लिखने से आप अपनी डायरी में लिखे गए विषयों को अलग-अलग वर्गों में विभाजित कर सकते हैं। 
        6. संबोधन - यह केवल डायरी लेखन को निजी बनाने के लिए लिखा जाता है। पूरी तरह से वैकल्पिक है।   
        7. विषय विस्तार - यह जानकारी आपके डायरी की जान होती है। इसमें पूरी घटना को भावपूर्ण ढंग से काल क्रमानुसार सविस्तार लिखना होता है। 
        8. नाम व हस्ताक्षर - डायरी को अपनी व्यक्तिगत बनाने के लिए उसपर आपका नाम व हस्ताक्षर अंत मे होना अंत्यन्त आवश्यक है। 

        अभ्यास प्रश्न  - 

        1. आपकी आज की दिनचर्या का वर्णन करते हुए एक डायरी लेखन कीजिए। 
        2. कल रात आपने एक स्वप्न देखा, जिसे याद करते हुए एक डायरी लेखन कीजिए। 
        3. आज आपको विद्यालय की ओर से एक 'बाल कल्याण आश्रम' में ले जाया गया था। वहाँ आपने देखा कि बच्चों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उनकी व्यथा को अपने आज के अनुभव के साथ अपनी डायरी में लिखिए।     


        रविवार, 26 मार्च 2023

        Blog लेखन (चिट्ठाकारी)

        IGCSE और IBDP के लिए ब्लॉग लेखन (चिट्ठाकारी) मार्गदर्शिका — IndiCoach International
        IndiCoach Writing Lab · Hindi

        ब्लॉग लेखन (चिट्ठाकारी) मार्गदर्शिका

        ब्लॉग लेखन केवल “ऑनलाइन डायरी” नहीं, बल्कि व्यक्तिगत अनुभव, विचार और तर्क को पाठकों से सीधी बातचीत की शैली में साझा करने की कला है। यह पेज विशेष रूप से IGCSE तथा IBDP Hindi learners के लिए तैयार किया गया है।

        लेखक: Arvind Bari · IndiCoach International टेक्स्ट-प्रकार: Blog / Chitthakari स्तर: IGCSE 0549 & IBDP Hindi B
        परिचय

        ब्लॉग लेखन क्या है? (IGCSE दृष्टि से)

        ‘ब्लॉग’ को हिंदी में ‘चिट्ठाकारी’ कहा जाता है। यह इंटरनेट आधारित एक ऑनलाइन मंच (platform) होता है, जहाँ कोई भी व्यक्ति अपने विचार, अनुभव और जानकारी को सार्वजनिक रूप से साझा कर सकता है।

        Blog शब्द की जड़ “web-log” है — यानी वेब पर दर्ज होता हुआ एक तरह का लॉग या डायरी। समय के साथ यही वेब-लॉग संक्षिप्त होकर ब्लॉग बन गया।

        त्वरित शब्दावली: ब्लॉग, ब्लॉगिंग और ब्लॉगर
        • ब्लॉग (Blog): वह ऑनलाइन पेज/साइट जिस पर नियमित रूप से लेख, अनुभव या विचार लिखे जाएँ।
        • ब्लॉगिंग (Blogging): ब्लॉग पर लिखने, अद्यतन (update) करने और पाठकों से संवाद करने की पूरी प्रक्रिया।
        • ब्लॉगर (Blogger): जो व्यक्ति ब्लॉग लिखता या चलाता है।
        • हिंदी चिट्ठाकारी: देवनागरी लिपि (हिंदी) में लिखे गए ब्लॉग, जिन्हें हम सामान्यतः “हिंदी ब्लॉग” कहते हैं।

        IGCSE परीक्षा में ब्लॉग सामान्यतः 120–150 शब्द में लिखा जाता है, जहाँ आपसे अपेक्षा होती है कि आप:

        • स्पष्ट और सुसंगत विचार रखें
        • पाठकों से सीधे संवाद की तरह लिखें
        • विषय पर केंद्रित और सुव्यवस्थित रहें
        मुख्य विशेषताएँ

        IGCSE ब्लॉग की शैली और स्वर

        1. अनौपचारिक, लेकिन संयमित भाषा
        ब्लॉग में सहज, बोलचाल के निकट भाषा का प्रयोग करें, जैसे आप किसी मित्र से बात कर रहे हों। लेकिन बहुत अधिक slang या अशिष्ट शब्दावली से बचें। IGCSE में भाषा अनौपचारिक होते हुए भी शिष्ट और व्याकरण-सम्मत होनी चाहिए।
        2. व्यक्तिगत दृष्टिकोण और “मैं” का प्रयोग
        IGCSE ब्लॉग में मैं, हम, आप का प्रयोग स्वाभाविक है। अपने अनुभव, भावनाएँ और छोटे-छोटे प्रसंग साझा करें — इससे लेख जीवंत हो जाता है।
        3. आकर्षक शीर्षक और छोटे अनुच्छेद
        शीर्षक ऐसा हो जो पाठक का ध्यान तुरंत खींच ले, जैसे – “मेरी पहली हिमालय यात्रा का रोमांच” या “ऑनलाइन पढ़ाई ने मुझे क्या सिखाया?”। पढ़ने में आसानी के लिए 2–4 पंक्तियों वाले छोटे पैराग्राफ रखें।
        4. सुसंगत शुरुआत–मध्य–निष्कर्ष
        • प्रस्तावना: रोचक वाक्य, घटना या प्रश्न से शुरुआत
        • मुख्य भाग: अनुभव, उदाहरण और सरल तर्क
        • निष्कर्ष: सार-संक्षेप, संदेश या प्रश्न के साथ समापन
        संरचना

        IGCSE ब्लॉग की संरचना (120–150 शब्द)

        1. शीर्षक (Title): स्पष्ट, रोचक और विषय से जुड़ा हुआ
        2. प्रस्तावना (2–3 पंक्तियाँ): विषय का परिचय + उत्सुकता
        3. मुख्य भाग (6–8 पंक्तियाँ): अनुभव, उदाहरण, सरल तर्क
        4. निष्कर्ष (2–3 पंक्तियाँ): आपकी सीख/संदेश + पाठक से हल्का संवाद

        IGCSE में शब्दसीमा से बहुत अधिक ऊपर या नीचे जाना अच्छा नहीं माना जाता।

        ब्लॉगिंग का उपयोग

        ब्लॉग लिखने का उद्देश्य (IGCSE समझ स्तर)

        संक्षेप में, ब्लॉगिंग हमें यह अवसर देती है कि हम:

        • अपने विचार, ज्ञान और अनुभव साझा करें — दुनिया के साथ या अपने छोटे पाठक-समूह के साथ।
        • अपने लेखन कौशल को विकसित करें — नियमित लेखन से भाषा और सोच दोनों निखरती हैं।
        • व्यक्तिगत विकास करें — अपने विचारों को शब्दों में ढालते-ढालते सोच साफ होती है।
        • प्रतिक्रिया प्राप्त करें — पाठकों की टिप्पणी (feedback) से सुधार के अवसर मिलते हैं।

        परीक्षा में आप इन बिंदुओं को सीधे नहीं, बल्कि स्वाभाविक अनुभव और प्रसंगों के माध्यम से व्यक्त करते हैं।

        उदाहरण विषय

        अभ्यास के लिए संभावित ब्लॉग-विषय

        • मेरा पसंदीदा त्योहार और उससे जुड़ी यादें
        • स्कूल में पहला दिन — डर, उत्साह या दोनों?
        • मोबाइल और मैं — दोस्त या दुश्मन?
        • मेरी ज़िंदगी की सबसे यादगार यात्रा
        • ऑनलाइन पढ़ाई ने मुझे क्या सिखाया?
        अन्य लोकप्रिय ब्लॉग-विषय (वास्तविक दुनिया के संदर्भ से)
        • खाने-पीने पर ब्लॉग: होटलों/रेस्तराँ की समीक्षा, रेसिपी, street food अनुभव आदि।
        • यात्रा (Travel) ब्लॉग: यात्रा गाइड, बजट, जगहों की समीक्षा, अनुभव साझा करना।
        • फैशन और सौंदर्य: फैशन ट्रेंड्स, कपड़ों और ऐक्सेसरीज़ की सलाह, styling tips।
        • स्वास्थ्य और फिटनेस: diet, exercise, वजन घटाने या बढ़ाने की रणनीतियाँ।
        • विज्ञान और तकनीक: नए gadgets, apps, inventions और innovations पर लेख।

        इनमें से किसी भी क्षेत्र को आप IGCSE के स्तर पर सरल, व्यक्तिगत अनुभवों के साथ लिख सकते हैं।

        नमूना ब्लॉग

        उदाहरण ब्लॉग: “मेरी पहली हिंदी कक्षा का अनुभव”

        मेरी पहली हिंदी कक्षा का अनुभव — घबराहट से आत्मविश्वास तक

        प्रस्तावना:
        क्या आपको अपनी पहली हिंदी कक्षा याद है? जब मैंने IGCSE में हिंदी चुनी, तो मन में हजारों सवाल थे। देवनागरी लिपि, मात्राएँ और व्याकरण — सब कुछ एक बड़ा पहाड़ लग रहा था।

        मुख्य भाग:
        पहली कक्षा में बोर्ड पर लिखे हिंदी शब्द किसी खूबसूरत कला की तरह लग रहे थे। मेरी शिक्षिका ने मुस्कुराकर कहा, “घबराइए नहीं, हम एक-एक कदम चलेंगे।” पहले हफ्ते में केवल वर्णमाला और कुछ आसान शब्दों पर काम हुआ। शुरू में “क” और “ख” में फर्क समझना भी मुश्किल लगा, लेकिन रोज़ 15 मिनट का अभ्यास धीरे-धीरे चमत्कार करने लगा।

        सबसे मज़ेदार पल तब आया जब मैंने गलती से लिखा, “मैं स्कूल जाता हूँ” की जगह “मैं स्कूल खाता हूँ”। पूरी कक्षा हँस पड़ी और मैं भी अपनी गलती पर हँसने लगा। उसी दिन समझ गया कि गलतियाँ भी सीखने का हिस्सा हैं।

        निष्कर्ष:
        कुछ महीनों बाद मैं सरल हिंदी वाक्य पढ़ने और लिखने लगा था। फिल्मों के गाने भी ज़्यादा समझ में आने लगे। अब पीछे मुड़कर देखता हूँ तो महसूस होता है कि शुरू की घबराहट अनावश्यक थी। हिंदी ने मुझे नई भाषा के साथ-साथ एक नया आत्मविश्वास भी दिया।

        आपका हिंदी सीखने का अनुभव कैसा रहा? कृपया अपने अनुभव टिप्पणी में साझा करें!

        शिक्षक इस उदाहरण को 120–150 शब्दों की सीमा में edit करवाकर छात्रों से स्वयं re-draft भी करवा सकते हैं — यह plagiarism-safe practice बनेगी।

        इंटरैक्टिव क्विज़

        Quick Check · क्या आप IGCSE ब्लॉग लेखन समझ गए?

        1. IGCSE ब्लॉग के लिए सबसे उपयुक्त स्वर (tone) कैसा होना चाहिए?
        2. ब्लॉग के निष्कर्ष में क्या करना अच्छा माना जाता है?
        3. IGCSE ब्लॉग में “मैं” और “आप” का प्रयोग…
        स्व-अभ्यास · प्रस्तावना

        Practice 1: केवल प्रस्तावना लिखिए

        नीचे दिए विषयों में से किसी एक को चुनें और केवल 3–4 पंक्तियों की प्रस्तावना लिखें, जैसे किसी ब्लॉग की शुरुआत हो:

        • “समय का सदुपयोग — मेरी छोटी रणनीतियाँ”
        • “मेरी सबसे यादगार ऑनलाइन क्लास”
        • “एक दिन बिना मोबाइल के — क्या सच में संभव है?”

        शिक्षक चाहें तो इस सेक्शन को कॉपी कर प्रिंटेबल worksheet या क्लास चर्चा के लिए उपयोग कर सकते हैं।

        स्व-अभ्यास · पूर्ण ब्लॉग

        Practice 2: पर्यटन स्थल पर आधारित ब्लॉग लिखिए

        किसी पर्यटन स्थल पर आधारित एक छोटा ब्लॉग लिखिए। आपका ब्लॉग लगभग 150–200 शब्द का हो सकता है (शिक्षक आवश्यकता अनुसार सीमा बदल सकते हैं)।

        अपने ब्लॉग में निम्न बिंदुओं को अवश्य शामिल करें:

        • यह किस प्रकार का पर्यटन स्थल है? उसका सामान्य परिचय
        • आप वहाँ तक कैसे पहुँचे? साधन, दूरी, सुविधाएँ आदि
        • घूमने/देखने योग्य मुख्य स्थान (places of interest)
        • आपका व्यक्तिगत अनुभव — क्या सीखा, कैसा महसूस हुआ

        संकेत: शिक्षक चाहें तो विषय-वस्तु के लिए 8 अंक और भाषा के लिए 8 अंक देकर कुल 16 अंकों की rubric बना सकते हैं।

        Self-check

        Blog Quality Scale · अपनी रचना को स्वयं आँकें

        नीचे दिए शब्दों का उपयोग करके विद्यार्थी स्वयं यह अनुमान लगा सकते हैं कि उनका ब्लॉग किस स्तर पर है:

        • प्रतिष्ठित: भाषा, विचार, संरचना — तीनों अत्यंत उच्च स्तर के, प्रभाव बहुत गहरा।
        • श्रेष्ठ: अधिकतर बातें स्पष्ट, सुव्यवस्थित और रोचक; छोटे-मोटे सुधार की गुंजाइश।
        • मध्यम: बात समझ में आती है, पर भाषा/संरचना या उदाहरणों में और निखार संभव।
        • काम चलाऊ: विषय से जुड़े हैं, पर पढ़ने में आकर्षण या स्पष्टता कम; पुनर्लेखन आवश्यक।
        • हास्यास्पद: न तो भाषा का ध्यान, न विषय का; यह स्तर केवल मज़ाक के लिए नहीं, सुधार की चेतावनी के लिए है!

        शिक्षक चाहें तो इन स्तरों को board पर लिखकर विद्यार्थियों से अपने ब्लॉग का स्वयं मूल्यांकन करवाएँ, फिर peer-feedback से तुलना कराएँ।

        IBDP संदर्भ

        IBDP में ब्लॉग लेखन: केवल “अनुभव” नहीं, बल्कि “दृष्टिकोण”

        IBDP Hindi B में ब्लॉग लेखन का स्तर IGCSE से एक कदम ऊपर माना जाता है। यहाँ केवल अनुभव सुनाना ही नहीं, बल्कि अनुभव के पीछे के विचार, मूल्य और दृष्टिकोण पर भी प्रकाश डालना अपेक्षित होता है।

        सामान्यतः शब्द सीमा लगभग 350–450 शब्द होती है। इसलिए संरचना वही रहते हुए गहराई, विश्लेषण (analysis) और चिंतन (reflection) अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

        संक्षिप्त इतिहास

        ब्लॉगिंग कहाँ से शुरू हुई? (Timeline Snapshot)

        ब्लॉगिंग का इतिहास जानना IB learners के लिए संदर्भ (context) समझने में मदद करता है:

        • 1990 के दशक की शुरुआत: वेब पर व्यक्तिगत पेज, जिन पर लोग अपने विचार/नोट्स लिखते थे।
        • लगभग 1994: शुरुआती प्रोग्रामर्स और वेब-पायनियर्स ने अपने जीवन और काम के बारे में नियमित वेब-लॉग लिखना शुरू किया।
        • लगभग 1997 के आसपास: पहले सार्वजनिक वेबलॉग्स (जैसे “Links.net”) ने ब्लॉगिंग को आम पाठकों तक पहुँचाया।
        • आज: ब्लॉगिंग व्यक्तिगत डायरी से आगे बढ़कर पत्रकारिता, व्यवसाय, शिक्षा और सामाजिक सक्रियता का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है।

        आप इस पृष्ठभूमि का संक्षिप्त उल्लेख IBDP ब्लॉग की प्रस्तावना में कर सकते हैं, यदि विषय तकनीक, मीडिया या संचार से जुड़ा हो।

        शैली और अपेक्षा

        IB ब्लॉग की प्रमुख विशेषताएँ

        1. पाठक और उद्देश्य की स्पष्ट पहचान (Audience & Purpose)
        IBDP में examiner यह देखना चाहता है कि आप जानते हैं: आप किसके लिए लिख रहे हैं (क्लास ब्लॉग, स्कूल वेबसाइट, youth forum, आदि) और क्यों लिख रहे हैं (प्रेरित करने, प्रश्न उठाने, जागरूकता बढ़ाने, अनुभव साझा करने के लिए, आदि)।
        2. व्यक्तिगत अनुभव + व्यापक संदर्भ
        केवल “मैंने क्या किया” बताना पर्याप्त नहीं; यह भी दिखाएँ कि यह अनुभव समाज, संस्कृति, शिक्षा, तकनीक या पहचान जैसे बड़े संदर्भों से कैसे जुड़ता है।
        3. चिंतनशील (reflective) और संतुलित स्वर
        भाषा अभी भी संवादात्मक रह सकती है, लेकिन तर्क, उदाहरण और स्व-चिंतन (self-reflection) ज़्यादा स्पष्ट होना चाहिए। एक ही पक्ष को पकड़कर चीखने की बजाय संतुलित दृष्टि दिखाएँ।
        4. संरचना: गहराई के साथ वही चौखटा
        • प्रस्तावना: प्रसंग + मुद्दा + उद्देश्य
        • मुख्य भाग: 2–3 उप-खंड (अनुभव + विश्लेषण + प्रभाव)
        • निष्कर्ष: चिंतन, आगे की राह, पाठक के लिए प्रश्न
        ब्लॉगिंग के उपयोग

        क्यों ज़रूरी है ब्लॉगिंग? (IB दृष्टिकोण)

        IBDP स्तर पर ब्लॉगिंग को केवल “शौक” के रूप में नहीं, बल्कि संचार, पहचान और सीखने के मंच के रूप में समझा जा सकता है:

        • विचारों की सार्वजनिक अभिव्यक्ति: किसी विशिष्ट व्यक्ति को संबोधित किए बिना अपनी राय को विश्व समुदाय तक पहुँचाने का माध्यम।
        • व्यक्तिगत और सामाजिक संवाद: लेखक और पाठकों के बीच comments, sharing और प्रतिक्रिया के जरिए सक्रिय संवाद।
        • व्यवसायिक/प्रोफेशनल उपयोग: organizations अपने उत्पाद, सेवाएँ और मूल्य (values) ब्लॉग के माध्यम से समझा सकते हैं।
        • ज्ञान-संचय और चिंतन: अपने learning-journey, CAS प्रोजेक्ट या TOK सोच को शब्दों में दर्ज करना।
        • सुधार और feedback: ब्लॉग पर मिलने वाली प्रतिक्रियाएँ (positive/critical) लेखक के विकास में अहम भूमिका निभाती हैं।

        आप इन बिंदुओं को ब्लॉग के अंदर सीधे सूची के रूप में नहीं, बल्कि प्रसंग, उदाहरण और reflection के रूप में बुनते हैं।

        विषय-विस्तार

        IBDP के लिए संभावित ब्लॉग-विषय

        • “सोशल मीडिया और मेरी भाषा — अभिव्यक्ति की आज़ादी या नई कैद?”
        • “ऑनलाइन शिक्षा: अवसर, असमानता और मेरी भूमिका”
        • “CAS प्रोजेक्ट ने मुझे भाषा और समाज के बारे में क्या सिखाया?”
        • “माँ की भाषा, मेरी पहचान — बहुभाषी घर में बड़ा होना”
        • “पर्यावरण-संकट और रोज़मर्रा की मेरी छोटी आदतें”
        Popular global blog domains (subject ideas)
        • Travel blogs: यात्राएँ, संस्कृतियाँ, वैश्विक अनुभव
        • Food blogs: व्यंजन, रेसिपी, food-culture और sustainability
        • Fashion & Lifestyle: trends, identity, consumer-culture
        • Health & Wellness: mental health, fitness, balanced living
        • Science & Technology: AI, social media, privacy, innovation

        IBDP में आप इन विषयों पर केवल “जानकारी” नहीं, बल्कि ethical, social और cultural पहलुओं पर भी लिखते हैं।

        ब्लॉग vs व्लॉग

        Blogging और “Vlogging” में अंतर

        आजकल कई विद्यार्थी ब्लॉग के साथ-साथ वीडियो ब्लॉगिंग (Vlogging) भी करते हैं। दोनों के बीच कुछ मूल अंतर समझना उपयोगी है:

        • ब्लॉग (Blog): मुख्यतः लिखित (text-based) सामग्री — लेख, फोटो, लिंक, कभी-कभी embedded ऑडियो/वीडियो के साथ।
        • व्लॉग (Vlog): वीडियो आधारित ब्लॉग — जहाँ ब्लॉगर कैमरे के सामने बोलते हुए अपने विचार, अनुभव या जानकारी साझा करता है (जैसे YouTube vlogs)।
        • भाषा कौशल: ब्लॉग में लिखित भाषा और संरचना पर अधिक ध्यान, व्लॉग में मौखिक अभिव्यक्ति, body-language और visuals पर।
        • IBDP Hindi B में: परीक्षा में आपसे लिखित ब्लॉग अपेक्षित होता है, पर कक्षा-गतिविधियों में vlog-अनुभवों पर लिखना भी एक अच्छा creative exercise हो सकता है।
        नमूना ब्लॉग (संक्षिप्त रूप)

        उदाहरण ब्लॉग: “ऑनलाइन दुनिया और मेरी हिंदी”

        ऑनलाइन दुनिया और मेरी हिंदी — इमोजी से आगे की बातचीत

        प्रस्तावना:
        जबसे पढ़ाई, दोस्ती और शौक — सब कुछ मोबाइल की स्क्रीन के भीतर समा गए हैं, मेरी हिंदी भी बदल गई है। कभी “नमस्ते” की जगह “hi” और “धन्यवाद” की जगह “thnx” लिखते-लिखते मुझे लगा कि कहीं मैं अपनी ही भाषा से दूर तो नहीं हो रहा?

        मुख्य भाग 1 — अनुभव:
        लॉकडाउन के दिनों में मैं दिनभर चैट और ऑनलाइन क्लास में हिंदी-इंग्लिश का मिला–जुला मिश्रण लिखता रहा। शुरुआत में यह आसान लगा, लेकिन एक दिन दादी ने मेरा WhatsApp पढ़कर पूछा, “तुम्हें ‘धन्यवाद’ लिखने में शर्म आती है क्या?” उनके इस सवाल ने मुझे अंदर से झकझोर दिया।

        मुख्य भाग 2 — विश्लेषण:
        मैंने महसूस किया कि भाषा केवल शब्द नहीं, बल्कि रिश्ते और संस्कृति की डोरी भी है। जब मैं अपनी ही भाषा को छोटा समझकर shortcuts में बदल देता हूँ, तो कहीं न कहीं अपने ही अनुभवों को भी हल्का कर देता हूँ। वहीं दूसरी ओर, यह भी सच है कि नई पीढ़ी के लिए इमोजी और छोटे messages तेज गति की दुनिया में जरूरी लगते हैं।

        मुख्य भाग 3 — संतुलन की खोज:
        मैंने तय किया कि shortcuts को पूरी तरह छोड़ूँगा नहीं, लेकिन संदर्भ देखकर भाषा चुनूँगा। दादी के साथ पूरी हिंदी, दोस्तों के साथ मिश्रित लेकिन सम्मानजनक शब्द, और औपचारिक मेल या CAS reflections में अधिक सुसंगत, शुद्ध भाषा।

        निष्कर्ष:
        आज मुझे लगता है कि डिजिटल दुनिया ने मुझे भाषा के साथ अधिक सचेत बना दिया है। अब मैं हर message में यह सोचता हूँ कि मेरा शब्द केवल “seen” नहीं, बल्कि किसी की भावना को भी छू रहा है। शायद सही सवाल यह नहीं कि “हिंदी बची रहेगी या नहीं”, बल्कि यह है कि मैं अपनी हिंदी को कैसे जीता हूँ?

        आप डिजिटल बातचीत में अपनी भाषा को कैसे संभालते हैं? क्या आपने भी ऐसे बदलाव महसूस किए हैं?

        शिक्षक चाहें तो ऊपर के ब्लॉग को 350–450 शब्दों में विस्तारित या संक्षिप्त करवा सकते हैं, और Learner portfolio में reflection के रूप में जोड़ सकते हैं।

        IBDP Quick Check

        Concept Check · IBDP ब्लॉग की समझ

        1. IBDP ब्लॉग में IGCSE की तुलना में अतिरिक्त रूप से क्या अपेक्षित है?
        2. IBDP ब्लॉग में “पाठक और उद्देश्य” स्पष्ट करना क्यों ज़रूरी है?
        Reflective Practice

        Practice: IB शैली की प्रस्तावना लिखिए

        निम्न prompt पर केवल 5–6 पंक्तियों की प्रस्तावना लिखिए, जिसमें अनुभव + मुद्दा + उद्देश्य तीनों झलकें:

        “स्कूल ने जब ‘बहुभाषी दिवस’ मनाया, तब पहली बार मुझे अपनी मातृभाषा के बारे में गंभीरता से सोचने का अवसर मिला…”

        यह अभ्यास IBDP learners के लिए IO/WA के संदर्भ में भाषा, पहचान और संस्कृति पर चिंतन विकसित करने में मदद कर सकता है।

        Self-check

        Blog Quality Scale · IBDP दृष्टि से

        IBDP स्तर पर वही पाँच शब्द एक थोड़े अलग lens से देखे जा सकते हैं:

        • प्रतिष्ठित: content, structure, language और reflection — चारों rubric descriptors के highest band के अनुरूप।
        • श्रेष्ठ: clarity और coherence बहुत अच्छी, argument और उदाहरण मजबूत; थोड़ी polishing से शीर्ष स्तर।
        • मध्यम: विचार मौजूद हैं, पर depth, connection या language-register में असमानता; काम करने की गुंजाइश स्पष्ट।
        • काम चलाऊ: topic-addressed है लेकिन purpose, audience या organization अस्पष्ट; re-structuring आवश्यक।
        • हास्यास्पद: IB standards से बहुत दूर; इसे “warning level” की तरह लें — यहाँ से ऊपर की ओर journey शुरू होती है!

        📄 ब्लॉग vs लेख vs रिपोर्ट — तुलना तालिका

        पहलू / Feature ब्लॉग (Blog / चिट्ठाकारी) लेख (Article / निबंध) रिपोर्ट (Report)
        मुख्य उद्देश्य विचार, अनुभव व भावनाएँ साझा करना; संवाद स्थापित करना किसी विषय का विश्लेषण, विवेचन, तर्क किसी घटना/कार्य/सर्वे का तथ्यात्मक, वस्तुनिष्ठ विवरण
        स्वर (Tone) अनौपचारिक, संवादात्मक, मित्रवत औपचारिक या अर्ध-औपचारिक; संतुलित औपचारिक, स्पष्ट, निष्पक्ष
        भाषा सरल, सहज, “मैं–आप” स्वीकार्य सटीक, तर्कयुक्त, संतुलित शब्दावली संक्षिप्त, स्पष्ट, केवल तथ्य
        पाठक (Audience) सामान्य ऑनलाइन पाठक, युवा, सहपाठी पत्रिका, समाचार-पत्र, शैक्षणिक समुदाय प्रधानाचार्य/संस्था/अधिकारी/समिति
        संरचना शीर्षक → प्रस्तावना → अनुभव/विचार → निष्कर्ष/प्रश्न शीर्षक → परिचय → तर्क/उदाहरण → निष्कर्ष शीर्षक → भूमिका → तथ्य/डाटा → निष्कर्ष/सुझाव
        तथ्यों का उपयोग वैकल्पिक (अनुभव आधारित लेखन) जरूरत अनुसार; विषय पर निर्भर अनिवार्य — निरीक्षण, घटनाएँ, आँकड़े
        व्यक्तिगत राय प्रोत्साहित (स्वर व्यक्तिगत) संयमित, नियंत्रित नहीं — वस्तुनिष्ठता आवश्यक
        निष्कर्ष भावनात्मक/प्रश्न के साथ समाप्ति सार-संक्षेप, तार्किक सुझाव निष्कर्ष + सिफारिशें (Recommendations)
        IGCSE उपयोग Paper-1 Blog Writing Article Writing School Report / Event Report
        IBDP उपयोग HL/SL Blog — personal + reflective Opinion/Analytical piece Investigative / Factual report
        सामान्य गलतियाँ बहुत casual होना / विषय से भटकना बहुत subjective बन जाना राय लिख देना / कहानी जैसा बना देना

        गुरुवार, 23 मार्च 2023

        वाद-विवाद : तथ्यात्मक जानकारी के साथ अपनी मौखिक क्षमता का विकास।

        वाद-विवाद क्या है?

        'वाद-विवाद' दो शब्दों के मेल से बना हैं, वाद और विवाद। इसे समझने के पूर्व उनको भी समझ लेना में आवश्यक समझा हूँ। दोनों ही शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के 'वद्' धातु से हुई है, जिसका अर्थ बोलना होता है।

        वाद - वाद एक तरह की विचार-विनिमय प्रक्रिया होती है, जिसमें दो या अधिक व्यक्तियों के बीच एक मुद्दे पर विचारों का विनिमय होता है। वाद में हर व्यक्ति अपने विचारों को व्यक्त करता है और दूसरों के विचारों को समझने की कोशिश करता है। वाद का मुख्य उद्देश्य होता है अधिक से अधिक सटीकता और सत्यता को प्राप्त करना।

        विवाद - विवाद को सरल भाषा में हम बहस भी कहते हैं। जो दो व्यक्तियों अथवा दो गुटों के बीच किसी मुद्दे पर वैचारिक मतभेद के कारण उत्पन्न होती है। उस विषय पर वे असहमत होते हैं और उनके बीच तनाव उत्पन्न होता है। यह तनाव अकसर भिन्न मतों, विचारों, मान्यताओं या उनके विवेकों के विपरीत होने के कारण भी हो सकता है और समाधान की खोज में समय लगता है। अतः विवाद में व्यक्तियों का मुख्य उद्देश्य बन जाता है और अपनी बात को दूसरे के बात से श्रेयस्कर साबित करना होता है। विवाद कई अवस्थाओं में हो सकता है, जैसे कि व्यक्तिगत या सामाजिक मुद्दों पर, राजनीतिक विषयों पर, आर्थिक मुद्दों पर या किसी अन्य विषय पर असहमति होने की स्थिति में।

        वाद-विवाद

        सौजन्य - गूगल इमेज

        अतः 'वाद-विवाद', 'वाद और विवाद' दोनों का मिला-जुला रूप है। वैसे तो यह पूर्णतः संभाषण कौशल विकसित करने से संबंधित एक उत्कृष्ट कला है। इसमें भी दो या दो से अधिक लोग अथवा समूह किसी एक विषय पर आपस में विवाद करते हैं। यह एक महत्वपूर्ण कौशल है जो व्यक्ति की अपनी मौखिक क्षमता का विकास करने में शायक होता है।

        वाद-विवाद के दौरान, आपको तथ्यात्मक जानकारी का अच्छा ज्ञान होना चाहिए। तथ्य आपको बिना भावनाओं या पक्षपात के विषय पर बात करने में मदद करते हैं। वाद-विवाद के माध्यम से आप न केवल तथ्यों को समझने में महारत हासिल करते हैं, बल्कि अपनी मौखिक क्षमता को भी बढ़ाते हैं। वाद-विवाद आपको अपनी सोच को तैयार करने और अपनी बात को आदर्शपूर्ण तरीके से व्यक्त करने की संभावनाएं प्रदान करता है। इसके अलावा, आपको विवाद के दौरान अपनी मौखिक क्षमता का उपयोग करना चाहिए। यह हमारी सहनशीलता को भी बढ़ाता हैं। बिना किसी को चोट पहुंचाए, अथवा उसकी भावना को बिना आहत किए। सबकी बातों को कड़वी और असह्य बातों को धैर्यपूर्वक सुनकर उन बातों का अपने तथ्यों से सम्मानजनक से खंडन करते हुए अपने विचारों को आत्मविश्वास से मंडित करने की कला वास्तव में वाद-विवाद की आत्मा और परम कौशल है।

        वाद-विवाद के माध्यम से आप न केवल तथ्यों को समझने में महारत हासिल करते हैं, बल्कि अपनी मौखिक क्षमता को भी बढ़ाते हैं। वाद-विवाद आपको अपनी सोच को तैयार करने और अपनी बात को आदर्शपूर्ण तरीके से व्यक्त करने की संभावनाएं प्रदान करता है।

        वाद-विवाद कैसे होता है?

        वाद-विवाद में आमतौर पर दो टीमें होती हैं। प्रत्येक टीम अपने विषय पर आरंभिक भाषण देती है जो दोनों टीमों के सदस्यों द्वारा सुना जाता है। फिर उनके पास एक-दूसरे को प्रतिभागियों के विषय पर प्रश्न और उत्तर देने का मौका होता है। उसके बाद, प्रत्येक टीम को अपने विषय के बारे में अपने दलील देनी होती है जो उन्हें समर्थन करती है। अंत में, प्रत्येक टीम को अपने विषय पर एक संक्षेप में आरंभिक भाषण देना होता है। वाद-विवाद में सामान्यतः समय सीमा होती है जो समय-सीमित रहता है, जिसके बाद टीमों को अपने विषय के बारे में कुछ भी बोलने का मौका नहीं मिलता है। इसके अलावा, दलीलें और आरंभिक भाषणों के लिए समय सीमा भी होती है। वाद-विवाद के नियम के तहत सभी प्रतिभागी संयुक्त रूप से नियंत्रक द्वारा निर्दिष्ट नियमों का पालन करने के लिए भी दबाव में रहते हैं।


        वाद विवाद के ज्वलंत शीर्षकों की सूची दी जा रही है आप किसी एक पर पक्ष / विपक्ष में आपने विचार लिखने का प्रयास करें।

        1. क्या विज्ञान और धर्म के बीच एक विरोध है?
        2. आधुनिक तकनीकी का मानव जीवन पर असर: सकारात्मक या नकारात्मक?
        3. क्या प्रतियोगिता या सहयोग समाज के लिए अधिक उपयोगी है?
        4. क्या धर्म आतंकवाद का मूल है?
        5. क्या भारतीय संस्कृति और परंपरा का संरक्षण विकास के रास्ते का रुख है?
        6. क्या नागरिकता संशोधन बिल नागरिकों के अधिकारों को छीनने की तरफ है?
        7. क्या विदेशी नीति देश के विकास में अहम भूमिका निभाती है?
        8. समाज के लिए शिक्षा का महत्व: सरकारी या निजी संस्थाएं?
        9. आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष: शक्ति या सहनशीलता?
        10. आज के आधुनिक युग में भी परम्पराओं से जुड़े रहना जरूरी हैं?

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