सुर्खाब के पर
प्रकृति, प्रतीक और स्मृति की उड़ान
संध्या का समय है। झील के जल पर हल्की लहरें हैं और आकाश में ढलते सूर्य की सुनहरी आभा फैल रही है। दूर से एक जोड़ा आता हुआ दिखाई देता है — दो पक्षी, जिनके पंख हवा में फैले हैं और जिनकी उड़ान में एक अजीब सी लय है, जैसे कोई पुरानी धुन हो। ये हैं सुर्खाब — वे पक्षी जो केवल प्रकृति का हिस्सा नहीं, बल्कि हमारी कविताओं, कहानियों और लोकगीतों में भी जीवित हैं।
उड़ते समय सुर्खाब के पंखों में केसरिया, श्वेत और गहरे रंग की छाया दिखाई देती है। जब सूर्य की रोशनी इन पंखों पर पड़ती है, तो वे ऐसे चमकते हैं जैसे किसी चित्रकार ने प्रकृति के कैनवास पर रंग भर दिए हों। ये रंग केवल सुंदरता के लिए नहीं हैं — ये पहचान, संदेश और अस्तित्व की घोषणा हैं।
हिंदी साहित्य में सुर्खाब को चकवा और चकवी के रूप में भी जाना जाता है। लोककथाओं में कहा जाता है कि रात में ये दोनों अलग हो जाते हैं और सुबह फिर मिलते हैं। यह कथा प्रेम और विरह का प्रतीक बन गई है। कवियों ने इसे अनगिनत बार अपनी रचनाओं में स्थान दिया है।
"सुर्खाब के पर" का उपयोग उर्दू और हिंदी कविता में असंभव या दुर्लभ वस्तु के रूपक के लिए होता है — जैसे कुछ ऐसा जो सुंदर तो हो, पर पाना कठिन।
वैज्ञानिक दृष्टि से सुर्खाब Ruddy Shelduck या Brahminy Duck के नाम से जाना जाता है। ये प्रवासी पक्षी हैं जो सर्दियों में भारत आते हैं। इनकी उड़ान लंबी और नियमित होती है — ये हजारों किलोमीटर की यात्रा करते हैं, पीढ़ी दर पीढ़ी वही मार्ग अपनाते हैं। इनकी यह यात्रा न केवल जैविक आवश्यकता है, बल्कि प्रकृति के अदृश्य नियमों का पालन भी है।
रोचक तथ्य
• सुर्खाब जोड़े में रहते हैं और जीवनभर एक ही साथी के प्रति वफादार रहते हैं
• इनकी आवाज़ तेज़ और विशिष्ट होती है, जो दूर से ही सुनाई देती है
• ये झीलों, नदियों और जलाशयों के किनारे घोंसला बनाते हैं
सुर्खाब के पंख केवल उड़ने के साधन नहीं, बल्कि प्रतीक हैं — स्वतंत्रता, गति और दूरियों को पार करने की क्षमता के। जब ये पक्षी उड़ते हैं, तो उनके पंख हवा को काटते हैं और एक लय बनाते हैं। यह लय प्रकृति की संगीत की तरह होती है — बिना शब्दों के, बिना भाषा के।
आज जब हम शहरों में रहते हैं, जहाँ आकाश में बिल्डिंगें हैं और झीलें सिकुड़ रही हैं, तब सुर्खाब की उड़ान हमें याद दिलाती है कि प्रकृति अभी भी जीवित है। उनके पंखों में वह सब कुछ है जो हमने खो दिया है — खुलापन, स्वतंत्रता, और अपने रास्ते को जानने का विश्वास।
जब अगली बार आप किसी झील के किनारे जाएँ और आकाश में उड़ते सुर्खाब देखें, तो थोड़ा रुकें। उनके पंखों को देखें, उनकी उड़ान को महसूस करें। वे केवल पक्षी नहीं हैं — वे स्मृति, प्रतीक और प्रकृति की कविता हैं।
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