भारतीय गुरुकुल शिक्षा
भारतीय गुरुकुल शिक्षा प्रणाली प्राचीन भारत की वह सुदृढ़ आधारशिला थी, जिसमें शिक्षा को केवल ज्ञान-संचय नहीं, बल्कि चरित्र-निर्माण, आत्मानुशासन और सामाजिक दायित्व से जोड़ा गया था1। "गुरु–कुल" का तात्पर्य था - गुरु का परिवार; जहाँ विद्यार्थी गुरु के आश्रम में रहकर जीवन को समग्र रूप में समझते और सीखते थे2।
इस प्रणाली की एक प्रमुख विशेषता आवासीय और सहजीवी शिक्षा थी। विद्यार्थी प्रकृति के निकट रहते हुए वेद, उपनिषद, व्याकरण, गणित, खगोल, आयुर्वेद, शस्त्र-विद्या, संगीत तथा नैतिक शिक्षा जैसे विषयों का अध्ययन करते थे3। शिक्षा पुस्तकों तक सीमित न होकर अनुभव, संवाद और अनुशासन से विकसित होती थी। गुरु की भूमिका केवल अध्यापक की नहीं, बल्कि मार्गदर्शक और जीवन-निर्माता की थी। प्रत्येक शिष्य की क्षमता, रुचि और स्वभाव के अनुसार शिक्षण दिया जाता था - जो आज की 'personalised learning' अवधारणा से मेल खाता है4।
गुरुकुल व्यवस्था का एक अत्यंत महत्वपूर्ण, किंतु आधुनिक विमर्श में प्रायः उपेक्षित पक्ष यह था कि शिक्षा का कोई प्रत्यक्ष आर्थिक भार न तो अभिभावकों पर होता था और न ही शिक्षार्थियों पर5। शिक्षा को व्यापार नहीं, बल्कि सामाजिक कर्तव्य माना जाता था। गुरुकुल का संचालन समाज, दानदाताओं और राज्य के संरक्षण से होता था। विद्यार्थी शिक्षा पूर्ण होने पर गुरुदक्षिणा देते थे, जो अनिवार्य शुल्क नहीं बल्कि कृतज्ञता, सामर्थ्य और स्वेच्छा पर आधारित होती थी6।
भिक्षाटन की परंपरा भी इसी दर्शन से जुड़ी थी। इसका उद्देश्य निर्धनता नहीं, बल्कि अहंकार-शून्यता, श्रम-मूल्य और सामाजिक समरसता का विकास था7। इससे विद्यार्थी समाज के सभी वर्गों से जुड़ते और शिक्षा को समाज-सेवा से अलग नहीं मानते थे।
वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो प्राकृतिक वातावरण में अध्ययन, नियमित दिनचर्या, मौखिक परंपरा द्वारा स्मृति-विकास तथा योग–ध्यान जैसी विधियाँ आज के cognitive science और holistic education सिद्धांतों से मेल खाती हैं8। मैक्स म्यूलर और विल ड्यूरेंट जैसे पाश्चात्य विद्वानों ने भारतीय शिक्षा की इस समग्रता और मानवीय दृष्टिकोण की विशेष प्रशंसा की है9।
यह स्वीकार करना आवश्यक है कि समय के साथ गुरुकुल प्रणाली भी सीमाओं और सामाजिक असमानताओं से पूर्णतः मुक्त नहीं रह सकी10, फिर भी इसके मूल सिद्धांत - शिक्षा, मूल्य और समाज का समन्वय - आज की परीक्षा-केन्द्रित और शुल्क-प्रधान शिक्षा व्यवस्था के लिए एक गंभीर वैकल्पिक दृष्टि प्रस्तुत करते हैं।
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🎥 वीडियो देखें: गुरुकुल शिक्षा की अवधारणा
📌 यह वीडियो गुरुकुल शिक्षा की अवधारणा को दृश्यात्मक रूप से स्पष्ट करता है।
🧠 माइंड मैप देखें: गुरुकुल शिक्षा
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📊 PPT देखें: Gurukul Education System
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📝 क्विज़: गुरुकुल शिक्षा (Self-Check)
Q1. गुरुकुल शिक्षा में शिक्षा को किस रूप में देखा जाता था?
Q2. गुरुदक्षिणा का उद्देश्य क्या था?
Q3. गुरुकुल और आधुनिक शिक्षा में एक मुख्य अंतर लिखिए।
✅ उत्तर देखें
Q1. सामाजिक कर्तव्य के रूप में।
Q2. कृतज्ञता और सामर्थ्य की अभिव्यक्ति।
Q3. गुरुकुल में मूल्य-आधारित शिक्षा, आधुनिक में परीक्षा-केंद्रित।
🎓 IGCSE AO1 / AO2 practice
📄 वर्कशीट: Gurukul Education
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संदर्भ / Footnotes
1. राधाकृष्णन, Indian Philosophy, 1951
2. Altekar, Education in Ancient India, 1934
3. Dasgupta, A History of Indian Philosophy, 1922
4. NCERT, Ancient Indian Education, 2006
5. Altekar, वही, अध्याय 3
6. University Education Commission, 1948–49
7. K. M. Panikkar, 1964
8. OECD, The Nature of Learning, 2010
9. Will Durant, Our Oriental Heritage, 1935
10. Romila Thapar, Early India, 2002
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