DME: क्या यही है भारत का अगला स्वच्छ ईंधन?
ऊर्जा केवल सुविधा नहीं, बल्कि सभ्यता की दिशा तय करती है। जब यही ऊर्जा प्रदूषण बढ़ाने लगे, तब समाधान की खोज आवश्यक हो जाती है। ऐसे समय में डाइमिथाइल ईथर (DME) एक उभरता हुआ विकल्प है।
यह एक रंगहीन गैस है, जिसे दबाव में तरल रूप में संग्रहित किया जा सकता है। इसका दहन अधिक स्वच्छ होता है।
DME का निर्माण संश्लेषण गैस से किया जाता है, जो प्राकृतिक गैस, कोयले या बायोमास से प्राप्त होती है।
इसका उपयोग डीज़ल इंजनों में किया जा सकता है। इसका सेटन नंबर अधिक होता है, जिससे बेहतर दहन होता है और कालिख नहीं बनती।
भारत में नीति आयोग, CSIR और Indian Oil जैसे संस्थान इस पर कार्य कर रहे हैं। यह ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
पर्यावरण की दृष्टि से, यह कणीय प्रदूषण को कम करता है। भविष्य में यह एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक ईंधन बन सकता है।