शनिवार, 31 जनवरी 2026

हिंदी बोलना देशभक्ति से कम नहीं!

हिंदी बोलना, राष्ट्रभक्ति से कम नहीं है | आदर्श लेखन अभ्यास | IndiCoach

हिंदी बोलना, राष्ट्रभक्ति से कम नहीं है

प्रश्न सहित लेख-लेखन का आदर्श उदाहरण | IGCSE • IBDP Hindi

🎯 उद्देश्य: यह पेज छात्रों को यह समझाने के लिए तैयार किया गया है कि परीक्षा में *संतुलित, तर्कसंगत और प्रभावी* लेख कैसे लिखा जाता है।

📘 प्रश्न

हिंदी बोलना, राष्ट्रभक्ति से कम नहीं है।

आप इस मत से कहाँ तक सहमत हैं? अपने विचारों को स्पष्ट करते हुए स्कूल पत्रिका के लिए अपना लेख लगभग 400 शब्दों में लिखिए। आपका लेख विषय से संबंधित तथ्यों, उदाहरणों और तर्कों पर केंद्रित होना चाहिए।

संकेत:

  • राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक पहचान की भावना हिंदी से है।
  • हिंदी को सभी पर थोपना उचित नहीं; भाषाई विविधता का सम्मान आवश्यक है।

अंक-वितरण:
अंतर्वस्तु – 8 अंक | भाषा – 8 अंक

✍️ आदर्श लेख (Model Answer)

हिंदी बोलना, राष्ट्रभक्ति से कम नहीं है

भारत विविध भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं का देश है। यहाँ अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं, परंतु हिंदी का स्थान विशेष है। यह केवल एक संपर्क भाषा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक पहचान की सशक्त अभिव्यक्ति भी है। इसी संदर्भ में यह कथन विचारणीय है कि “हिंदी बोलना, राष्ट्रभक्ति से कम नहीं है।” मैं इस मत से काफी हद तक सहमत हूँ, परंतु इसके साथ संतुलित दृष्टिकोण अपनाना भी आवश्यक है।

हिंदी ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशवासियों को एक सूत्र में बाँधने का कार्य किया। नेताओं ने हिंदी को जनसंपर्क की भाषा बनाकर राष्ट्रभक्ति की भावना को जन-जन तक पहुँचाया। आज भी हिंदी देश के विभिन्न हिस्सों के लोगों को जोड़ने का कार्य करती है। अपनी भाषा में विचार व्यक्त करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव बना रहता है। इस दृष्टि से हिंदी बोलना निश्चित रूप से राष्ट्रप्रेम को सुदृढ़ करता है।

हालाँकि राष्ट्रभक्ति को केवल एक भाषा तक सीमित नहीं किया जा सकता। भारत की पहचान उसकी भाषाई विविधता में भी निहित है। प्रत्येक नागरिक को अपनी मातृभाषा में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। हिंदी को सभी पर थोपना न तो व्यावहारिक है और न ही लोकतांत्रिक। सच्ची राष्ट्रभक्ति दूसरों की भाषाओं और संस्कृतियों के सम्मान में निहित है।

अंततः कहा जा सकता है कि हिंदी बोलना राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है, इसलिए इसे राष्ट्रभक्ति से कम नहीं माना जा सकता। किंतु वास्तविक राष्ट्रभक्ति वही है, जो हिंदी का सम्मान करते हुए भाषाई विविधता को भी अपनाए।

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