शुक्रवार, 19 दिसंबर 2025

स्वयंसेवक: मानवता की धड़कन

स्वयंसेवक: मानवता की धड़कन | IndiCoach

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स्वयंसेवक: मानवता की धड़कन

जब हर सेकंड जीवन और मृत्यु का निर्णय करता है

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जब भी कोई दुर्घटना घटती है, भीड़ जमा हो जाती है। कोई सहानुभूति जताता है, कोई वीडियो बनाता है और अधिकांश लोग यह सोचकर पीछे हट जाते हैं कि कोई और मदद कर देगा। ऐसे क्षणों में जो व्यक्ति बिना स्वार्थ और भय के आगे बढ़ता है, वही स्वयंसेवक कहलाता है। स्वयंसेवक कोई पद या पेशा नहीं, बल्कि एक चेतन अवस्था है, जिसमें मनुष्य दूसरे के दुःख को अपना दुःख मानकर कर्म में उतर आता है।

स्वयंसेवक का अर्थ केवल सहायता करना नहीं, बल्कि सही समय पर सही कार्य करना है। आपात स्थितियों में—दुर्घटना, अचानक बीमारी या प्राकृतिक आपदा—यही स्वयंसेवक जीवन और मृत्यु के बीच सेतु बनते हैं। चिकित्सा विज्ञान स्पष्ट करता है कि प्रारंभिक कुछ मिनट निर्णायक होते हैं। यदि उसी समय सही सहायता मिल जाए, तो जीवन बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

5
पहले मिनट सबसे महत्वपूर्ण
70%
समय पर CPR से बचाव संभव
मानवता की शक्ति असीम

विश्व स्वास्थ्य संगठन और अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार, अनेक मौतें केवल इसलिए होती हैं क्योंकि पीड़ित को समय पर सहायता नहीं मिल पाती। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन बताता है कि हृदयाघात के पहले पाँच मिनट में CPR जीवन-रक्षा की संभावना कई गुना बढ़ा सकता है। इससे स्पष्ट है कि स्वयंसेवक किसी अस्पताल से कम महत्त्वपूर्ण नहीं, क्योंकि अस्पताल तक पहुँचने से पहले का समय उसी के हाथ में होता है।

"परहित सरिस धरम नहिं भाई" — भारतीय चिंतन में स्वयंसेवा को सर्वोच्च धर्म माना गया है।

महात्मा गांधी ने सेवा को मानव जीवन का सर्वोच्च मूल्य माना। स्वामी विवेकानंद ने नर सेवा को नारायण सेवा कहा, वहीं अल्बर्ट श्वाइत्ज़र ने हर जीवन के प्रति सम्मान को नैतिकता की नींव बताया। इन विचारों का सार यही है कि स्वयंसेवक समाज की आत्मा होते हैं—वे दिखाई कम देते हैं, पर उनके बिना समाज निर्जीव हो जाता है।

यह भी सत्य है कि बिना प्रशिक्षण सहायता हानिकारक हो सकती है। इसलिए स्वयंसेवक के लिए संवेदना के साथ कौशल आवश्यक है। प्राथमिक उपचार, CPR और आपात प्रबंधन का प्रशिक्षण स्वयंसेवक को सक्षम बनाता है। 'गुड समैरिटन' जैसे कानून सहायता करने वालों को कानूनी सुरक्षा देकर इस भावना को और सशक्त बनाते हैं।

आज का विद्यार्थी केवल परीक्षा देने वाला नहीं, बल्कि भविष्य का जागरूक नागरिक है। संकट के समय मूक दर्शक बने रहना आसान है, पर आगे बढ़कर सहायता करना ही वास्तविक साहस है। लोक में कहा गया है—एक हाथ से ताली नहीं बजती, पर कई बार वही एक हाथ जीवन थाम लेता है।

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