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सशक्त आधुनिक नारी |
सृष्टि की प्रत्येक धारा में नारी शक्ति का योगदान अद्वितीय और अनुपम है। यह शक्ति केवल जैविक निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि समस्त ब्रह्मांड की आधारशिला है। नारी केवल जन्मदात्री ही नहीं, बल्कि पालनहार, संरक्षक, मार्गदर्शक और समाज को सही दिशा देने वाली प्रेरणास्त्रोत भी है। भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति का प्रतीक माना गया है, और चैत्र नवरात्रि इसी शक्ति की साधना और आराधना का पर्व है।
चैत्र नवरात्रि का प्रत्येक दिन माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा के लिए समर्पित होता है। यह देवी दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का पावन अवसर है, जहां उन्हें शक्ति, ज्ञान, धैर्य, करुणा, और रक्षा के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। नारी स्वयं में इस आदिशक्ति का प्रतिरूप है। हमारे प्राचीन ग्रंथों में स्त्री को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। ऋग्वेद से लेकर महाभारत तक, नारी का सम्मान और उसकी शक्ति को स्वीकार किया गया है। गार्गी, मैत्रेयी, मदालसा और सावित्री जैसी विदुषियों ने समाज को अपने ज्ञान और नीतियों से आलोकित किया।[^1]
जैसा कि कहा गया है:
"नारी तुम केवल श्रद्धा हो, विश्वास रजत नग पगतल में।
पीयूष स्रोत सी बहा करो, जीवन के सुंदर समतल में।।"[^2]
नारी के अनेक रूप हैं—वह मां है, जो वात्सल्य की प्रतिमूर्ति है। वह बहन है, जो स्नेह का प्रतीक है। वह बेटी है, जो सृजन की निरंतरता का आधार है। वह पत्नी है, जो प्रेम, सहयोग और समर्पण की प्रतिमा है। वह शिक्षिका है, जो ज्ञान का संचार करती है। नारी के बिना समाज की कल्पना अधूरी है।
आज के आधुनिक समाज में नारी शक्ति को नए आयाम मिल रहे हैं। महिलाएं शिक्षा, विज्ञान, राजनीति, कला, साहित्य और व्यापार के क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। भारतीय महिला वैज्ञानिकों ने मंगलयान मिशन में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई, खेल के क्षेत्र में मैरी कॉम और सायना नेहवाल जैसी हस्तियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का गौरव बढ़ाया।[^3]
चैत्र नवरात्रि हिंदू पंचांग के अनुसार नववर्ष का प्रारंभ मानी जाती है। यह वसंत ऋतु का प्रारंभिक पर्व है, जो प्रकृति के पुनरुत्थान और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है। भारत में इसे विभिन्न रूपों में मनाया जाता है। उत्तर भारत में इसे राम नवमी के रूप में मनाया जाता है, जबकि महाराष्ट्र में 'गुड़ी पड़वा' के रूप में इसे नई फसल और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में इसे 'उगादि' के रूप में नववर्ष के स्वागत के रूप में मनाया जाता है। पश्चिम बंगाल और ओडिशा में देवी दुर्गा की उपासना विशेष रूप से होती है।[^4]
नवरात्रि केवल देवी की पूजा करने का पर्व नहीं, बल्कि यह स्त्री के महत्व को समझने और स्वीकार करने का अवसर भी है। यह पर्व हमें यह संदेश देता है कि नारी का सम्मान और उसकी स्वतंत्रता समाज की प्रगति के लिए आवश्यक है। जिस समाज में नारी का सम्मान होता है, वह समाज सृजनशील, समृद्ध और संतुलित होता है।[^5]
जैसा कि वाल्मीकि रामायण में कहा गया है:
"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः।।"[^6]
आज भी कई क्षेत्रों में नारी को संघर्ष करना पड़ रहा है। शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सम्मान के लिए नारी को अब भी अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ता है। डिजिटल युग में महिलाएं वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रही हैं, लेकिन समान वेतन, लैंगिक भेदभाव, घरेलू हिंसा और कार्यस्थल पर असुरक्षा जैसी समस्याएँ अभी भी बनी हुई हैं। महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा और असमान अवसरों को समाप्त करने के लिए सरकारें और सामाजिक संगठन प्रयासरत हैं। "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" जैसी योजनाएँ, समान वेतन के लिए कानून और कार्यस्थल पर सुरक्षा उपाय, इन चुनौतियों को हल करने के महत्वपूर्ण कदम हैं।[^7]
इसके बावजूद, आधुनिक नारी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रही है और आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है। वह घर-परिवार के साथ-साथ व्यवसाय, विज्ञान, तकनीक, राजनीति, और प्रशासन में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। जब नारी को स्वतंत्रता, शिक्षा और आत्मनिर्णय का अधिकार मिलेगा, तभी समाज में वास्तविक उन्नति संभव होगी। नारी को केवल देवी के रूप में पूजने से अधिक, उसे वास्तविक जीवन में सशक्त बनाने की आवश्यकता है। माता भगवती का आशीर्वाद तभी साकार होगा जब हम नारी शक्ति को सामाजिक, आर्थिक और मानसिक रूप से सुदृढ़ बनाएंगे।
नारी शक्ति संपूर्ण सृष्टि का आधार है। वह केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि संपूर्ण युगों की प्रेरणास्त्रोत है। चैत्र नवरात्रि हमें यह अवसर प्रदान करता है कि हम नारी के सम्मान और गरिमा को स्वीकारें और उसे सशक्त बनाने का संकल्प लें। मां भगवती के चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए, हम सभी को यह समझना होगा कि नारी के बिना समाज अपूर्ण है। लेकिन अब यह कहानी बदल रही है। आज की नारी सशक्त, आत्मनिर्भर और अपनी पहचान खुद बनाने में सक्षम है। आइए, इस चैत्र नवरात्रि पर नारी शक्ति के जागरण का संकल्प लें और समाज में स्त्री सत्ता को उसका उचित स्थान दें।
संदर्भ- ऋग्वेद, उपनिषदों में नारी की महत्ता।
- मैथिलीशरण गुप्त की कविता "नारी तुम केवल श्रद्धा हो"।
- इसरो, मंगलयान मिशन में महिलाओं की भूमिका।
- भारतीय पंचांग और नवरात्रि के विभिन्न रूप।
- स्त्री सशक्तिकरण पर भारतीय ग्रंथों के विचार।
- वाल्मीकि रामायण, स्त्रियों के सम्मान पर कथन।
- भारत सरकार की महिला सशक्तिकरण योजनाएँ।