एक सुनहरी सुबह, जब सूरज की किरणें धरती पर बिखर रही थीं, भारत के एक छोटे से शहर के स्कूल में हलचल मची थी। इसरो (ISRO - Indian Space Research Organisation) ने एक खास मिशन की घोषणा की थी - "चंद्रयान-प्रेरणा"। इस मिशन में पाँच उत्साही छात्रों - रिया, आरव, सौम्या, सिद्धांत और मान्या - को चन्द्रमा की सैर पर ले जाया जाना था। ये बच्चे भूगोल और अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति अपनी जिज्ञासा के लिए चुने गए थे। उनकी आँखों में सपने थे और मन में सवालों का अथाह समंदर। अंतरिक्ष यान तैयार था। इसरो के वैज्ञानिक डॉ. अनिल और डॉ. स्मिता बच्चों को समझा रहे थे, "ये यान चन्द्रमा तक 3,84,400 किलोमीटर की यात्रा करेगा। इसमें हमें तीन दिन लगेंगे।" आरव ने तुरंत पूछा, "लेकिन गुरुत्वाकर्षण हमें नीचे क्यों नहीं खींचेगा?" डॉ. स्मिता मुस्कुराईं और बोलीं, "अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण बहुत कम होता है। हमारा यान रॉकेट की श क्ति से पृथ्वी के गुरुत्व को पार कर लेगा।" बच्चों की आँखें चमक उठीं।
तीन दिन बाद, जब यान चन्द्रमा की सतह पर उतरा, बच्चों ने बाहर झाँका। चारों ओर धूसर मिट्टी, गहरे गड्ढे और ऊबड़-खाबड़ पहाड़ दिखे। रिया ने उत्साह से कहा, "ये तो चंदा मामा की कहानियों से बिल्कुल अलग है!" डॉ. अनिल हँसे, "हाँ, चंदा मामा एक कविता है, पर असल चन्द्रमा एक उपग्रह है जो पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाता है। यहाँ न पानी है, न हवा, और न ही जीवन।" बच्चों ने अपने अंतरिक्ष सूट पहने और चन्द्रमा की सतह पर कदम रखा। कम गुरुत्वाकर्षण के कारण वे उछल-उछल कर चल रहे थे। सौम्या ने पूछा, "ये गड्ढे कैसे बने?" डॉ. स्मिता ने बताया, "ये उल्कापिंडों के टकराने से बने हैं। चन्द्रमा पर वायुमंडल नहीं है, इसलिए उल्काएँ सीधे सतह से टकराती हैं।" सिद्धांत ने दूरबीन उठाई और बोला, "वहाँ देखो! क्या वो धरती है?" दूर नीला-हरा गोला चमक रहा था। डॉ. अनिल ने कहा, "हाँ, ये हमारा घर है। पृथ्वी का 71% हिस्सा पानी से ढका है, इसलिए ये नीली दिखती है।"
वापसी की तैयारी करते हुए सिद्धांत ने पूछा, "क्या हम कभी चन्द्रमा पर घर बना सकते हैं?" डॉ. अनिल ने जवाब दिया, "शायद हाँ। लेकिन इसके लिए हमें ऑक्सीजन, पानी और ऊर्जा की व्यवस्था करनी होगी। विज्ञान इसे संभव बना सकता है।" जब यान वापस पृथ्वी की ओर बढ़ा, बच्चों के मन में चंदा मामा की कविताएँ नहीं, बल्कि चन्द्रमा का असल चेहरा बस गया था। उन्हें समझ आ गया था कि भूगोल और विज्ञान हमें ब्रह्मांड के रहस्य खोलने की चाबी देते हैं। धरती पर लौटते ही सौम्या ने कहा, "अब मैं वैज्ञानिक बनूँगी और अंतरिक्ष के और राज़ जानूँगी!" बाकी बच्चे भी मुस्कुराए, क्योंकि उनकी जिज्ञासा अब सपनों को पंख दे चुकी थी।
💬 अपनी राय कमेंट में ज़रूर बताएँ और इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करें, ताकि हिंदी के इस खूबसूरत सफर में और बच्चे शामिल हो सकें!
कठिन शब्दावली
- सुनहरी सुबह – Golden morning
- किरणें – Rays
- हलचल – Hustle and bustle / Excitement
- घोषणा – Announcement
- मिशन – Mission
- उत्साही – Enthusiastic
- जिज्ञासा – Curiosity
- अथाह – Immense / Boundless
- गुरुत्वाकर्षण – Gravity
- अंतरिक्ष यान – Spacecraft
- वैज्ञानिक – Scientist
- रॉकेट – Rocket
- सतह – Surface
- धूसर मिट्टी – Greyish soil
- गड्ढे – Craters
- ऊबड़-खाबड़ – Rugged / Uneven
- कविता – Poem
- उपग्रह – Satellite
- वायुमंडल – Atmosphere
- उल्कापिंड – Meteorite
- दूरबीन – Telescope
- ग्रह – Planet
- सौरमंडल – Solar system
- बृहस्पति – Jupiter
- गैस – Gas
- निहारना – To gaze at
- गंभीरता – Seriousness
- बूँद – Drop
- अनमोल – Precious
- ऊर्जा – Energy
- ब्रह्मांड – Universe
- रहस्य – Mystery
- वापसी – Return
- व्यवस्था – Arrangement
- संभव – Possible
- राज़ – Secrets
- सपनों को पंख देना – To give wings to dreams
यह शब्दावली विज्ञान और अंतरिक्ष अन्वेषण से जुड़े हिंदी शब्दों को समझने में सहायक होगी। 😊🚀
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
आपके बहुमूल्य कॉमेंट के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।